फाइलेरिया नियंत्रण के लिए चलेगा विशेष जांच सर्वेक्षण अभियान

छत्तीसगढ़ संवाददाता गरियाबंद, 12 अगस्त। जिले में फाइलेरिया अथवा हाथी पांव बीमारी से बचाव और नियंत्रण के लिए कलेक्टर दीपक अग्रवाल के निर्देशानुसार विशेष अभियान चलाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग के समन्वय से जिले के सभी चिरायु दलों के द्वारा चिन्हित दिनों में स्कूलों में जाकर कक्षा पहली और दूसरी के सभी विद्यार्थियों का खून जांच किया जायेगा। पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों के रक्त जाँच से उसके परिवार में किसी को यह बीमारी है या नहीं ये पता लगाया जाएगा। इसी तारतम्य में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ गार्गी यदु पाल के मार्गदर्शन में फाइलेरिया के लिए संचरण मूल्यांकन सर्वेक्षण प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। जिसमें डबल्यूएचओ रायपुर के डॉ. राजेंद्र सिंह और जिला मलेरिया अधिकारी डॉ एम मनीष द्वारा गरियाबंद जिले के सभी विकासखंड के चिरायु दल, लैब टेक्नीशियन, पर्यवेक्षक ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया। फाइलेरिया के फैलाव, जांच की विधि और इसके इलाज के संबंध में जानकारी देते हुए डॉ. एम मनीष ने बताया कि फाइलेरिया एक संक्रामक बीमारी है जो कि मादा क्यूलेक्स नामक मच्छर के काटने से होता है। इस बीमारी में व्यक्ति के पैर हाथी पैर की तरह हो जाते है, इस कारण से इसे हाथी पांव कहते है। संक्रमित व्यक्ति को काटने के बाद किसी स्वस्थ व्यक्ति को यदि यह मच्छर काटता है तो उसमें एक साल बाद इस बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं। मुख्यत: हाथी पांव बीमारी के परजीवी शरीर के लिम्फ नोड्स, लिम्फ वाहिकाओं को प्रभावित करता है। शर्म या संकोच न करते हुए अंडकोष में सूजन, पैरों में सूजन होने पर नजदीकी अस्पताल जाकर इसकी जाँच अवश्य कराना चाहिए। प्रारंभिक जांच में बीमारी का पता चलने पर दवाइयों के सेवन से हाथी पांव बीमारी से पूर्ण रूप से बचा जा सकता है। साथ ही मच्छरों के प्रसार को रोकने तथा बीमारी से बचाव हेतु सोते समय मच्छरदानी का उपयोग, घरों के आसपास साफ सफाई के अलावा पानी के गड्डों, टूटे बर्तन, गमलों, में पानी जमा न होने देना या जला हुआ तेल डालना चाहिए। अनुपयोगी कुंआ में भी जला हुआ तेल डालना चाहिए। इससे मच्छरों के पनपने के स्त्रोत को नियंत्रित कर सकते हैं। प्रति वर्ष हाथी पांव बीमारी से बचाव और नियंत्रण हेतु फाइलेरियारोधी डीईसी की गोली और कृमि नाशक अल्बेंडाजोल की गोली सेवन के लिए विशेष कार्यक्रम भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाया जाता है।

फाइलेरिया नियंत्रण के लिए चलेगा विशेष जांच सर्वेक्षण अभियान
छत्तीसगढ़ संवाददाता गरियाबंद, 12 अगस्त। जिले में फाइलेरिया अथवा हाथी पांव बीमारी से बचाव और नियंत्रण के लिए कलेक्टर दीपक अग्रवाल के निर्देशानुसार विशेष अभियान चलाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग और शिक्षा विभाग के समन्वय से जिले के सभी चिरायु दलों के द्वारा चिन्हित दिनों में स्कूलों में जाकर कक्षा पहली और दूसरी के सभी विद्यार्थियों का खून जांच किया जायेगा। पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों के रक्त जाँच से उसके परिवार में किसी को यह बीमारी है या नहीं ये पता लगाया जाएगा। इसी तारतम्य में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ गार्गी यदु पाल के मार्गदर्शन में फाइलेरिया के लिए संचरण मूल्यांकन सर्वेक्षण प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। जिसमें डबल्यूएचओ रायपुर के डॉ. राजेंद्र सिंह और जिला मलेरिया अधिकारी डॉ एम मनीष द्वारा गरियाबंद जिले के सभी विकासखंड के चिरायु दल, लैब टेक्नीशियन, पर्यवेक्षक ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया। फाइलेरिया के फैलाव, जांच की विधि और इसके इलाज के संबंध में जानकारी देते हुए डॉ. एम मनीष ने बताया कि फाइलेरिया एक संक्रामक बीमारी है जो कि मादा क्यूलेक्स नामक मच्छर के काटने से होता है। इस बीमारी में व्यक्ति के पैर हाथी पैर की तरह हो जाते है, इस कारण से इसे हाथी पांव कहते है। संक्रमित व्यक्ति को काटने के बाद किसी स्वस्थ व्यक्ति को यदि यह मच्छर काटता है तो उसमें एक साल बाद इस बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं। मुख्यत: हाथी पांव बीमारी के परजीवी शरीर के लिम्फ नोड्स, लिम्फ वाहिकाओं को प्रभावित करता है। शर्म या संकोच न करते हुए अंडकोष में सूजन, पैरों में सूजन होने पर नजदीकी अस्पताल जाकर इसकी जाँच अवश्य कराना चाहिए। प्रारंभिक जांच में बीमारी का पता चलने पर दवाइयों के सेवन से हाथी पांव बीमारी से पूर्ण रूप से बचा जा सकता है। साथ ही मच्छरों के प्रसार को रोकने तथा बीमारी से बचाव हेतु सोते समय मच्छरदानी का उपयोग, घरों के आसपास साफ सफाई के अलावा पानी के गड्डों, टूटे बर्तन, गमलों, में पानी जमा न होने देना या जला हुआ तेल डालना चाहिए। अनुपयोगी कुंआ में भी जला हुआ तेल डालना चाहिए। इससे मच्छरों के पनपने के स्त्रोत को नियंत्रित कर सकते हैं। प्रति वर्ष हाथी पांव बीमारी से बचाव और नियंत्रण हेतु फाइलेरियारोधी डीईसी की गोली और कृमि नाशक अल्बेंडाजोल की गोली सेवन के लिए विशेष कार्यक्रम भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाया जाता है।