इंदौर के माहेश्वरी भवन में भागवत कथा:शिव-पार्वती विवाह उत्सव में उत्साह से शामिल हुए श्रद्धालु, भजनों पर नाचे
इंदौर के माहेश्वरी भवन में भागवत कथा:शिव-पार्वती विवाह उत्सव में उत्साह से शामिल हुए श्रद्धालु, भजनों पर नाचे
एबी रोड स्थित माहेश्वरी मांगलिक भवन में चल रही भागवत कथा के दूसरे दिन मंगलवार को भजन-कीर्तन और मंगल वाद्यों के बीच शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग हुआ। इस अनोखे विवाह उत्सव में भगवान शिव, माता पार्वती, नंदी और भूत-प्रेतों की प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रही। तीन श्रद्धालुओं ने भगवान शिव, माता पार्वती और नंदी का सजीव रूप धारण किया, वहीं बच्चों ने भूत-प्रेतों के रूप में अपने मनमोहक अभिनय से पूरे वातावरण को आनंदमय बना दिया। सभी पात्रों का श्रृंगार और उनकी जीवंत प्रस्तुतियां दर्शकों को खूब पसंद आई। इस दौरान भजनों पर श्रद्धालुओं ने नृत्य भी किया। व्यासपीठ पर विराजित पं. पुष्पानंदजी महाराज ने श्रीमद् भागवत के गहन रहस्यों को सरल शब्दों में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि जीवन को सुंदर और सफल बनाने के लिए श्रीमद् भागवत से प्राप्त शिक्षाओं को अपनाना आवश्यक है। कथा के दौरान उन्होंने स्त्रियों के सम्मान का महत्व समझाया और कहा कि स्त्रियां घर की लक्ष्मी होती हैं। उन्होंने बताया कि जब स्त्रियों का सम्मान किया जाता है और पति-पत्नी में परस्पर प्रेम और आदर का भाव होता है, तब संसार रामराज की तरह सुख-शांति से भर जाता है। ऐसे घर में स्वयं प्रभु श्रीराम धरती पर अपनी कृपा बरसाने आते हैं। श्रद्धालुजनों ने कथा और उसके दिव्य संदेशों को बड़ी श्रद्धा से सुना। दूर-दूर से आए श्रोतागण कथा के इन पावन क्षणों का लाभ उठाते हुए भक्ति रस में सराबोर हो गए। भक्ति और उल्लास से परिपूर्ण आयोजन ने सभी भक्तों के हृदय को छू लिया और पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं को दिव्य अनुभूति से भर दिया। राठी, परवाल, मालपानी एवं आगीवाल परिवारों के सैकड़ों सदस्यों की उपस्थिति और उनके संगठित प्रयासों ने आयोजन आनंददायी बन रहा है। कथा के शुभारंभ पर चारों परिवार के सदस्यों ने व्यासपीठ का पूजन किया और अंत में आरती की। इसके बाद प्रसाद वितरण किया गया।
एबी रोड स्थित माहेश्वरी मांगलिक भवन में चल रही भागवत कथा के दूसरे दिन मंगलवार को भजन-कीर्तन और मंगल वाद्यों के बीच शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग हुआ। इस अनोखे विवाह उत्सव में भगवान शिव, माता पार्वती, नंदी और भूत-प्रेतों की प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रही। तीन श्रद्धालुओं ने भगवान शिव, माता पार्वती और नंदी का सजीव रूप धारण किया, वहीं बच्चों ने भूत-प्रेतों के रूप में अपने मनमोहक अभिनय से पूरे वातावरण को आनंदमय बना दिया। सभी पात्रों का श्रृंगार और उनकी जीवंत प्रस्तुतियां दर्शकों को खूब पसंद आई। इस दौरान भजनों पर श्रद्धालुओं ने नृत्य भी किया। व्यासपीठ पर विराजित पं. पुष्पानंदजी महाराज ने श्रीमद् भागवत के गहन रहस्यों को सरल शब्दों में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि जीवन को सुंदर और सफल बनाने के लिए श्रीमद् भागवत से प्राप्त शिक्षाओं को अपनाना आवश्यक है। कथा के दौरान उन्होंने स्त्रियों के सम्मान का महत्व समझाया और कहा कि स्त्रियां घर की लक्ष्मी होती हैं। उन्होंने बताया कि जब स्त्रियों का सम्मान किया जाता है और पति-पत्नी में परस्पर प्रेम और आदर का भाव होता है, तब संसार रामराज की तरह सुख-शांति से भर जाता है। ऐसे घर में स्वयं प्रभु श्रीराम धरती पर अपनी कृपा बरसाने आते हैं। श्रद्धालुजनों ने कथा और उसके दिव्य संदेशों को बड़ी श्रद्धा से सुना। दूर-दूर से आए श्रोतागण कथा के इन पावन क्षणों का लाभ उठाते हुए भक्ति रस में सराबोर हो गए। भक्ति और उल्लास से परिपूर्ण आयोजन ने सभी भक्तों के हृदय को छू लिया और पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं को दिव्य अनुभूति से भर दिया। राठी, परवाल, मालपानी एवं आगीवाल परिवारों के सैकड़ों सदस्यों की उपस्थिति और उनके संगठित प्रयासों ने आयोजन आनंददायी बन रहा है। कथा के शुभारंभ पर चारों परिवार के सदस्यों ने व्यासपीठ का पूजन किया और अंत में आरती की। इसके बाद प्रसाद वितरण किया गया।