नाइट लैंडिंग की खुशी अधूरी- मशीन लगी, लाइसेंस मिला पर ATC चलाने स्टाफ नहीं

छत्तीसगढ़ संवाददाता बिलासपुर, 24फरवरी।बिलासा देवी केवट एयरपोर्ट को नाइट लैंडिंग की मंजूरी मिलने पर शहर में खुशी जरूर है,लेकिन हकीकत कुछ और ही कहानी कह रही है। एयरपोर्ट पर रात में विमान उतारने की तकनीकी व्यवस्था तो हो गई,लाइसेंस भी मिल गया,लेकिन एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर चलाने के लिए तीनों शिफ्ट में पर्याप्त तकनीकी स्टाफ ही नहीं है। इस वजह से बिलासपुर एयरपोर्ट अभी भी केवल एक ही8घंटे की शिफ्ट में संचालित हो रहा है। बिलासा देवी एयरपोर्ट में यहां नाइट लैंडिंग की सुविधा के लिए जरूरी मशीनें और तकनीकी उपकरण लगाए गए हैं। औपचारिक लाइसेंस भी मिल चुका है। लेकिन असली समस्या अब सामने आई है। एटीसी टावर को24घंटे या कम से कम16घंटे चलाने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी है। एयरपोर्ट पर फिलहाल एक ही शिफ्ट में काम हो रहा है,यानी करीब8घंटे तक ही विमान संचालन संभव है। यदि इसे रायपुर एयरपोर्ट की तरह16घंटे या दो शिफ्ट में चलाना हो,तो भी तकनीकी स्टाफ की कमी आड़े आ रही है। तीन शिफ्ट में संचालन की तो फिलहाल कल्पना भी मुश्किल बताई जा रही है। हवाई सुविधा जन संघर्ष समिति ने इस मुद्दे को गंभीर बताया है। समिति का कहना है कि नाइट लैंडिंग की सुविधा तभी सार्थक होगी,जब एयरपोर्ट पर एटीसी संचालन के लिए पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध हों। समिति के पदाधिकारियों ने राज्य शासन के विमानन विभाग से संपर्क किया। वहां से जानकारी मिली कि नई नियुक्तियों की प्रक्रिया चल रही है,लेकिन इसमें समय लग सकता है। समिति का कहना है कि अगर जल्द नियुक्तियां नहीं हुईं,तो सारी तकनीकी तैयारी बेकार साबित होगी। मशीनें लगने और लाइसेंस मिलने के बावजूद रात में विमान सेवा शुरू नहीं हो पाएगी। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की है कि इस मामले में तुरंत कदम उठाए जाएं। समिति ने एक व्यावहारिक सुझाव भी दिया है। राज्य सरकार को एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया से संपर्क कर अस्थायी तौर पर एक प्रशिक्षित एटीसी अधिकारी को बिलासपुर भेजने का अनुरोध करना चाहिए। जब तक राज्य स्तर पर स्थायी नियुक्ति नहीं हो जाती,तब तक प्रतिनियुक्ति के आधार पर काम चलाया जा सकता है। बाद में नियमित स्टाफ आने पर प्रतिनियुक्त अधिकारी को वापस भेजा जा सकता है। मालूम हो कि बिलासपुर लंबे समय से हवाई सुविधाओं के विस्तार की मांग करता रहा है। नाइट लैंडिंग की मंजूरी को विकास की दिशा में बड़ा कदम माना गया। व्यापार,शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में इसका सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। लेकिन यदि संचालन समय नहीं बढ़ा,तो यात्रियों को अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पाएगी।

नाइट लैंडिंग की खुशी अधूरी- मशीन लगी, लाइसेंस मिला पर ATC चलाने स्टाफ नहीं
छत्तीसगढ़ संवाददाता बिलासपुर, 24फरवरी।बिलासा देवी केवट एयरपोर्ट को नाइट लैंडिंग की मंजूरी मिलने पर शहर में खुशी जरूर है,लेकिन हकीकत कुछ और ही कहानी कह रही है। एयरपोर्ट पर रात में विमान उतारने की तकनीकी व्यवस्था तो हो गई,लाइसेंस भी मिल गया,लेकिन एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर चलाने के लिए तीनों शिफ्ट में पर्याप्त तकनीकी स्टाफ ही नहीं है। इस वजह से बिलासपुर एयरपोर्ट अभी भी केवल एक ही8घंटे की शिफ्ट में संचालित हो रहा है। बिलासा देवी एयरपोर्ट में यहां नाइट लैंडिंग की सुविधा के लिए जरूरी मशीनें और तकनीकी उपकरण लगाए गए हैं। औपचारिक लाइसेंस भी मिल चुका है। लेकिन असली समस्या अब सामने आई है। एटीसी टावर को24घंटे या कम से कम16घंटे चलाने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी है। एयरपोर्ट पर फिलहाल एक ही शिफ्ट में काम हो रहा है,यानी करीब8घंटे तक ही विमान संचालन संभव है। यदि इसे रायपुर एयरपोर्ट की तरह16घंटे या दो शिफ्ट में चलाना हो,तो भी तकनीकी स्टाफ की कमी आड़े आ रही है। तीन शिफ्ट में संचालन की तो फिलहाल कल्पना भी मुश्किल बताई जा रही है। हवाई सुविधा जन संघर्ष समिति ने इस मुद्दे को गंभीर बताया है। समिति का कहना है कि नाइट लैंडिंग की सुविधा तभी सार्थक होगी,जब एयरपोर्ट पर एटीसी संचालन के लिए पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध हों। समिति के पदाधिकारियों ने राज्य शासन के विमानन विभाग से संपर्क किया। वहां से जानकारी मिली कि नई नियुक्तियों की प्रक्रिया चल रही है,लेकिन इसमें समय लग सकता है। समिति का कहना है कि अगर जल्द नियुक्तियां नहीं हुईं,तो सारी तकनीकी तैयारी बेकार साबित होगी। मशीनें लगने और लाइसेंस मिलने के बावजूद रात में विमान सेवा शुरू नहीं हो पाएगी। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की है कि इस मामले में तुरंत कदम उठाए जाएं। समिति ने एक व्यावहारिक सुझाव भी दिया है। राज्य सरकार को एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया से संपर्क कर अस्थायी तौर पर एक प्रशिक्षित एटीसी अधिकारी को बिलासपुर भेजने का अनुरोध करना चाहिए। जब तक राज्य स्तर पर स्थायी नियुक्ति नहीं हो जाती,तब तक प्रतिनियुक्ति के आधार पर काम चलाया जा सकता है। बाद में नियमित स्टाफ आने पर प्रतिनियुक्त अधिकारी को वापस भेजा जा सकता है। मालूम हो कि बिलासपुर लंबे समय से हवाई सुविधाओं के विस्तार की मांग करता रहा है। नाइट लैंडिंग की मंजूरी को विकास की दिशा में बड़ा कदम माना गया। व्यापार,शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में इसका सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। लेकिन यदि संचालन समय नहीं बढ़ा,तो यात्रियों को अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पाएगी।