डीजल-खाद संकट पर फूटा किसानों का गुस्सा, एसडीएम दफ्तर घेरा

छत्तीसगढ़ संवाददाता प्रतापपुर,19 जून। खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही डीजल, खाद और उर्वरक की कमी से जूझ रहे किसानों का आक्रोश गुरुवार को प्रतापपुर तहसील परिसर में फूट पड़ा। बड़ी संख्या में किसानों ने एसडीएम कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन किया और अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रशासन के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान किसानों ने डीजल वितरण व्यवस्था, खाद की उपलब्धता तथा कालाबाजारी पर रोक लगाने की मांग उठाई। प्रदर्शन कर रहे किसानों ने आरोप लगाया कि प्रतापपुर विकासखंड के जरही, सोनगरा, खडग़वां, धोन्धा, रामपुर, भैसामुंडा, पोड़मोड़ सहित कई ग्रामीण क्षेत्रों में पेट्रोल पंपों की दूरी 20 किलोमीटर तक है। इसके बावजूद किसानों को जरीकन (डिब्बे) में डीजल देने से इनकार किया जा रहा है। वहीं ट्रैक्टर लेकर पेट्रोल पंप पहुंचने पर भी केवल एक हजार रुपये तक का डीजल दिया जा रहा है, जिससे खेतों की जुताई और सिंचाई कार्य प्रभावित हो रहे हैं। किसानों ने कहा कि खरीफ फसल की तैयारी के लिए जुताई, बीड़ा निर्माण और सिंचाई का कार्य तेजी से किया जाना आवश्यक है, लेकिन डीजल की कमी के कारण कृषि कार्य बाधित हो रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में उपयोग होने वाले छोटे कृषि यंत्रों और मशीनों को पेट्रोल पंप तक ले जाना संभव नहीं है, जिससे किसानों को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। धरना-प्रदर्शन के दौरान किसानों ने सहकारी समितियों में खाद और यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि उर्वरक वितरण के लिए परमिट जारी करने की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए तथा जिला सहकारी बैंक में जमा चेक राशि का शीघ्र खातों में अंतरण कर किसानों को नगद निकासी की सुविधा प्रदान की जाए। कालाबाजारी रोकने की मांग किसानों ने निजी उर्वरक एवं बीज विक्रेताओं पर खाद और बीज की काला बाजारी का आरोप लगाया। उनका कहना था कि कई व्यापारी स्टॉक छिपाकर किसानों को अधिक कीमत पर उर्वरक बेच रहे हैं। किसानों ने निजी दुकानों के स्टॉक का नियमित भौतिक सत्यापन, एमआरपी और बिलों की जांच तथा दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। ज्ञापन में किसानों ने मांग की कि ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को जुताई और सिंचाई कार्य के लिए जरीकन में कम से कम 50 लीटर डीजल उपलब्ध कराया जाए। किसानों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था खेती-किसानी के लिए अव्यावहारिक साबित हो रही है। आंदोलन तेज करने की चेतावनी किसानों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी। प्रदर्शन में विद्यासागर आयाम, नवीन जायसवाल, त्रिभुवन सिंह, जगत लाल आयाम, सुरेश चक्रधारी, शिवकुमार जायसवाल, नेहरू पटेल, विनोद नेताम, राजू सिंह आयाम, कलमेश राजवाड़े, प्यारेलाल नागवंशी, रामजनम यादव, जानसाय, विजय कुशवाहा सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। किसानों का कहना है कि समय रहते डीजल, खाद और बीज की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो खरीफ सीजन प्रभावित होगा और इसका सीधा असर किसानों की आजीविका पर पड़ेगा।

डीजल-खाद संकट पर फूटा किसानों का गुस्सा, एसडीएम दफ्तर घेरा
छत्तीसगढ़ संवाददाता प्रतापपुर,19 जून। खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही डीजल, खाद और उर्वरक की कमी से जूझ रहे किसानों का आक्रोश गुरुवार को प्रतापपुर तहसील परिसर में फूट पड़ा। बड़ी संख्या में किसानों ने एसडीएम कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन किया और अपनी विभिन्न मांगों को लेकर प्रशासन के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान किसानों ने डीजल वितरण व्यवस्था, खाद की उपलब्धता तथा कालाबाजारी पर रोक लगाने की मांग उठाई। प्रदर्शन कर रहे किसानों ने आरोप लगाया कि प्रतापपुर विकासखंड के जरही, सोनगरा, खडग़वां, धोन्धा, रामपुर, भैसामुंडा, पोड़मोड़ सहित कई ग्रामीण क्षेत्रों में पेट्रोल पंपों की दूरी 20 किलोमीटर तक है। इसके बावजूद किसानों को जरीकन (डिब्बे) में डीजल देने से इनकार किया जा रहा है। वहीं ट्रैक्टर लेकर पेट्रोल पंप पहुंचने पर भी केवल एक हजार रुपये तक का डीजल दिया जा रहा है, जिससे खेतों की जुताई और सिंचाई कार्य प्रभावित हो रहे हैं। किसानों ने कहा कि खरीफ फसल की तैयारी के लिए जुताई, बीड़ा निर्माण और सिंचाई का कार्य तेजी से किया जाना आवश्यक है, लेकिन डीजल की कमी के कारण कृषि कार्य बाधित हो रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में उपयोग होने वाले छोटे कृषि यंत्रों और मशीनों को पेट्रोल पंप तक ले जाना संभव नहीं है, जिससे किसानों को अतिरिक्त परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। धरना-प्रदर्शन के दौरान किसानों ने सहकारी समितियों में खाद और यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि उर्वरक वितरण के लिए परमिट जारी करने की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए तथा जिला सहकारी बैंक में जमा चेक राशि का शीघ्र खातों में अंतरण कर किसानों को नगद निकासी की सुविधा प्रदान की जाए। कालाबाजारी रोकने की मांग किसानों ने निजी उर्वरक एवं बीज विक्रेताओं पर खाद और बीज की काला बाजारी का आरोप लगाया। उनका कहना था कि कई व्यापारी स्टॉक छिपाकर किसानों को अधिक कीमत पर उर्वरक बेच रहे हैं। किसानों ने निजी दुकानों के स्टॉक का नियमित भौतिक सत्यापन, एमआरपी और बिलों की जांच तथा दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की मांग की। ज्ञापन में किसानों ने मांग की कि ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को जुताई और सिंचाई कार्य के लिए जरीकन में कम से कम 50 लीटर डीजल उपलब्ध कराया जाए। किसानों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था खेती-किसानी के लिए अव्यावहारिक साबित हो रही है। आंदोलन तेज करने की चेतावनी किसानों ने प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी। प्रदर्शन में विद्यासागर आयाम, नवीन जायसवाल, त्रिभुवन सिंह, जगत लाल आयाम, सुरेश चक्रधारी, शिवकुमार जायसवाल, नेहरू पटेल, विनोद नेताम, राजू सिंह आयाम, कलमेश राजवाड़े, प्यारेलाल नागवंशी, रामजनम यादव, जानसाय, विजय कुशवाहा सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे। किसानों का कहना है कि समय रहते डीजल, खाद और बीज की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो खरीफ सीजन प्रभावित होगा और इसका सीधा असर किसानों की आजीविका पर पड़ेगा।