टीकमगढ़ में अवैध घोषित कॉलोनियों में प्लॉट रजिस्ट्री जारी:उप पंजीयक बोली- 10 करोड़ के घाटे में जिला, रीसेल प्लॉट की हो रही रजिस्ट्री
टीकमगढ़ में अवैध घोषित कॉलोनियों में प्लॉट रजिस्ट्री जारी:उप पंजीयक बोली- 10 करोड़ के घाटे में जिला, रीसेल प्लॉट की हो रही रजिस्ट्री
टीकमगढ़ में जिला प्रशासन द्वारा अवैध घोषित कॉलोनियों के प्लॉटों की नियम विरुद्ध रजिस्ट्री का मामला सामने आया है। पिछले छह महीनों में कलेक्टर ने 296 अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई करते हुए प्लॉट विक्रय पर रोक लगाई थी। इसका उद्देश्य अवैध कॉलोनी काटने वालों द्वारा किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी को रोकना था। हालांकि, जिला पंजीयक कार्यालय में कलेक्टर के आदेशों की अनदेखी करते हुए अवैध कॉलोनियों में धड़ल्ले से प्लॉट बेचे जा रहे हैं। पिछले दो महीनों में बिना आवश्यक वैधानिक अनुमतियों के ऐसी कॉलोनियों में स्थित 100 से अधिक प्लॉटों की रजिस्ट्रियां कर दी गई हैं। नियमानुसार, किसी भी प्लॉट की रजिस्ट्री के समय कॉलोनी का नाम, सहायक संचालक नगर तथा ग्राम निवेश द्वारा स्वीकृत अभिन्यास (ले-आउट), विकास अनुमति और रेरा पंजीयन का उल्लेख अनिवार्य होता है। इसके बावजूद, अधिकांश विक्रय पत्रों में ये महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज किए बिना ही रजिस्ट्रियां कर दी गईं। कई दस्तावेजों में केवल खसरा नंबर और क्षेत्रफल का उल्लेख किया गया, जबकि कॉलोनी से जुड़ी वैधानिक जानकारियां पूरी तरह गायब थीं। सबसे गंभीर बात यह है कि अधिकांश प्लॉटों का रेरा रजिस्ट्रेशन नंबर भी नहीं दर्शाया गया, जबकि रेरा अधिनियम के तहत यह अनिवार्य है। उप-पंजीयक कार्यालय द्वारा दस्तावेजों का पंजीयन कर दिया गया, जिसे मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता, कॉलोनी विकास नियम और रेरा अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन माना जा रहा है। अवैध रजिस्ट्रियों से सबसे ज्यादा नुकसान आम खरीदारों को होता है। अवैध कॉलोनियों में खरीदे गए प्लॉटों पर भविष्य में न तो भवन निर्माण की अनुमति मिलती है और न ही सड़क, पानी, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं की कोई गारंटी रहती है। कई मामलों में खरीदारों को वर्षों तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है। इस मामले में जिला उप पंजीयक वसुंधरा पांडे का कहना है कि जो प्लॉट कॉलोनाइजर से आम लोग पहले ही खरीद चुके हैं, उन्हें रीसेल किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई विवादित मामला सामने आता है, तो उसकी जांच कराई जाएगी। वहीं, कलेक्टर विवेक श्रोतिय ने इस मामले को गंभीर बताया है। उन्होंने कहा कि यदि अवैध कॉलोनी में प्लॉट विक्रय किए जाने में लापरवाही बरती गई है, तो जांच के बाद संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
टीकमगढ़ में जिला प्रशासन द्वारा अवैध घोषित कॉलोनियों के प्लॉटों की नियम विरुद्ध रजिस्ट्री का मामला सामने आया है। पिछले छह महीनों में कलेक्टर ने 296 अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई करते हुए प्लॉट विक्रय पर रोक लगाई थी। इसका उद्देश्य अवैध कॉलोनी काटने वालों द्वारा किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी को रोकना था। हालांकि, जिला पंजीयक कार्यालय में कलेक्टर के आदेशों की अनदेखी करते हुए अवैध कॉलोनियों में धड़ल्ले से प्लॉट बेचे जा रहे हैं। पिछले दो महीनों में बिना आवश्यक वैधानिक अनुमतियों के ऐसी कॉलोनियों में स्थित 100 से अधिक प्लॉटों की रजिस्ट्रियां कर दी गई हैं। नियमानुसार, किसी भी प्लॉट की रजिस्ट्री के समय कॉलोनी का नाम, सहायक संचालक नगर तथा ग्राम निवेश द्वारा स्वीकृत अभिन्यास (ले-आउट), विकास अनुमति और रेरा पंजीयन का उल्लेख अनिवार्य होता है। इसके बावजूद, अधिकांश विक्रय पत्रों में ये महत्वपूर्ण जानकारियां दर्ज किए बिना ही रजिस्ट्रियां कर दी गईं। कई दस्तावेजों में केवल खसरा नंबर और क्षेत्रफल का उल्लेख किया गया, जबकि कॉलोनी से जुड़ी वैधानिक जानकारियां पूरी तरह गायब थीं। सबसे गंभीर बात यह है कि अधिकांश प्लॉटों का रेरा रजिस्ट्रेशन नंबर भी नहीं दर्शाया गया, जबकि रेरा अधिनियम के तहत यह अनिवार्य है। उप-पंजीयक कार्यालय द्वारा दस्तावेजों का पंजीयन कर दिया गया, जिसे मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता, कॉलोनी विकास नियम और रेरा अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन माना जा रहा है। अवैध रजिस्ट्रियों से सबसे ज्यादा नुकसान आम खरीदारों को होता है। अवैध कॉलोनियों में खरीदे गए प्लॉटों पर भविष्य में न तो भवन निर्माण की अनुमति मिलती है और न ही सड़क, पानी, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं की कोई गारंटी रहती है। कई मामलों में खरीदारों को वर्षों तक कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है। इस मामले में जिला उप पंजीयक वसुंधरा पांडे का कहना है कि जो प्लॉट कॉलोनाइजर से आम लोग पहले ही खरीद चुके हैं, उन्हें रीसेल किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई विवादित मामला सामने आता है, तो उसकी जांच कराई जाएगी। वहीं, कलेक्टर विवेक श्रोतिय ने इस मामले को गंभीर बताया है। उन्होंने कहा कि यदि अवैध कॉलोनी में प्लॉट विक्रय किए जाने में लापरवाही बरती गई है, तो जांच के बाद संबंधितों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।