इंदौर में विजय शाह के बयान पर दिग्विजय सिंह बोले:जो फैसला बीजेपी को लेना चाहिए था वह अदालत ने ले लिया, बीजेपी बचाने में लगी
इंदौर में विजय शाह के बयान पर दिग्विजय सिंह बोले:जो फैसला बीजेपी को लेना चाहिए था वह अदालत ने ले लिया, बीजेपी बचाने में लगी
इंदौर में आज पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले, पाकिस्तान पर की गई स्ट्राइक और विजय शाह के बयान को लेकर मीडिया से चर्चा की। दिग्गी ने कहा कि हाईकोर्ट के जज को बहुत बधाई और धन्यवाद दूंगा, जो फैसला बीजेपी को लेना चाहिए था वह अदालत ने ले लिया। आज तक बीजेपी ने कोई कार्यवाही नहीं की है। यानी बीजेपी विजय शाह को बचाने में लगी हुई है, मैंने कहा था मानसिकता, यही मानसिकता का विरोध कांग्रेस करती रही है। बीजेपी के प्रधानमंत्री, अध्यक्ष जेपी नड्डा क्या इस बयान को सही मानते हैं। अगर बयान को गलत मानते हैं, तो कार्यवाही कीजिए और शाह से सहमत हैं, तो उन्होंने जो कहा सही कहा। इंदौर में मीडिया से बात करते हुए दिग्विजय सिंह ने सवाल उठाया कि पहलगाम में हमला करने वाले चार आतंकियों की पहचान अब तक क्यों नहीं हो पाई है? इस दौरान सिंह ने केंद्र सरकार पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती आतंकवाद है, जबकि पाकिस्तान में आतंकियों को खुलेआम संरक्षण मिलता है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री खुद स्वीकारते हैं कि विदेशी ताकतों के दबाव में उन्हें आतंकियों को संरक्षण देना पड़ता है। आतंकियों की पहचान अब तक क्यों नहीं हुई इटावाबाद में ओसामा बिन लादेन का ठिकाना इस बात का सबूत है। दिग्विजय सिंह ने भारतीय सेना की तारीफ करते हुए कहा कि सेना और खुफिया तंत्र ने सही टारगेट पर हमला किया और पहलगाम का बदला लिया, लेकिन सवाल यह है कि पहलगाम में हमला करने वाले चार आतंकियों की पहचान अब तक क्यों नहीं हो पाई है? संघी ट्रोल आर्मी ने इस मुद्दे को ट्रोल किया दिग्विजय सिंह ने कहा कि इसे जानना जरूरी है। कांग्रेस नेता ने भाजपा की विचारधारा पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हिन्दू-मुस्लिम विभाजन की संघी विचारधारा समाज में घर कर चुकी है। कर्नल सोफिया कुरैशी के विवाद को लेकर दिग्विजय सिंह ने कहा कि भाजपा नेता विजय शाह के बयान से साफ है कि भाजपा की सोच क्या है। संघी ट्रोल आर्मी ने इस मुद्दे को ट्रोल किया और भाजपा ने विजय शाह पर कोई कार्यवाही नहीं की। संघी विचारधारा शाह के बयान में भी साफ नजर आती है दिग्विजय सिंह ने कहा कि कर्नल सोफिया कुरैशी को प्रवक्ता बनाए जाने पर भाजपा के नेताओं में होड़ मच गई कि हर मुद्दे को हिंदू-मुस्लिम रंग दिया जाए। भाजपा की ट्रोल आर्मी ने सिर्फ सोफिया कुरैशी ही नहीं, बल्कि भारत सरकार के प्रवक्ता विक्रम जीत और उनके परिवार को भी नहीं छोड़ा। सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ जहर उगला गया और दुख की बात यह है कि इन ट्रोल्स को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद फॉलो करते हैं। यह भाजपा की संघी विचारधारा को उजागर करता है, जो विजय शाह के बयान में भी साफ नजर आती है। अचानक सीजफायर का निर्णय कैसे? सीजफायर के मुद्दे पर भी दिग्विजय सिंह ने मोदी सरकार को घेरा। उन्होंने सवाल उठाया कि मोदी सरकार ने पाकिस्तान के साथ अचानक सीजफायर का निर्णय कैसे कर लिया? उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान के बाद पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारत के डीजीएमओ को सीजफायर की पेशकश की और सवाल उठाया कि इसके बाद भी सीजफायर का उल्लंघन क्यों हुआ? मोदी सरकार विपक्ष को विश्वास में लेने से डरती दिग्विजय सिंह ने कहा कि संकट के समय देश एकजुट होकर सेना के साथ है, लेकिन मोदी सरकार विपक्ष को विश्वास में लेने से डरती है। जबकि अटल बिहारी वाजपेयी के कहने पर जब चीन से युद्ध हुआ था तब सदन बुलाया गया था और विपक्ष के साथ बैठकर चर्चा हुई थी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विपक्ष के साथ बैठकर चर्चा करना थी लेकिन प्रधानमंत्री विपक्ष के साथ बैठकर चर्चा करने से डरते हैं।
इंदौर में आज पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले, पाकिस्तान पर की गई स्ट्राइक और विजय शाह के बयान को लेकर मीडिया से चर्चा की। दिग्गी ने कहा कि हाईकोर्ट के जज को बहुत बधाई और धन्यवाद दूंगा, जो फैसला बीजेपी को लेना चाहिए था वह अदालत ने ले लिया। आज तक बीजेपी ने कोई कार्यवाही नहीं की है। यानी बीजेपी विजय शाह को बचाने में लगी हुई है, मैंने कहा था मानसिकता, यही मानसिकता का विरोध कांग्रेस करती रही है। बीजेपी के प्रधानमंत्री, अध्यक्ष जेपी नड्डा क्या इस बयान को सही मानते हैं। अगर बयान को गलत मानते हैं, तो कार्यवाही कीजिए और शाह से सहमत हैं, तो उन्होंने जो कहा सही कहा। इंदौर में मीडिया से बात करते हुए दिग्विजय सिंह ने सवाल उठाया कि पहलगाम में हमला करने वाले चार आतंकियों की पहचान अब तक क्यों नहीं हो पाई है? इस दौरान सिंह ने केंद्र सरकार पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती आतंकवाद है, जबकि पाकिस्तान में आतंकियों को खुलेआम संरक्षण मिलता है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री खुद स्वीकारते हैं कि विदेशी ताकतों के दबाव में उन्हें आतंकियों को संरक्षण देना पड़ता है। आतंकियों की पहचान अब तक क्यों नहीं हुई इटावाबाद में ओसामा बिन लादेन का ठिकाना इस बात का सबूत है। दिग्विजय सिंह ने भारतीय सेना की तारीफ करते हुए कहा कि सेना और खुफिया तंत्र ने सही टारगेट पर हमला किया और पहलगाम का बदला लिया, लेकिन सवाल यह है कि पहलगाम में हमला करने वाले चार आतंकियों की पहचान अब तक क्यों नहीं हो पाई है? संघी ट्रोल आर्मी ने इस मुद्दे को ट्रोल किया दिग्विजय सिंह ने कहा कि इसे जानना जरूरी है। कांग्रेस नेता ने भाजपा की विचारधारा पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हिन्दू-मुस्लिम विभाजन की संघी विचारधारा समाज में घर कर चुकी है। कर्नल सोफिया कुरैशी के विवाद को लेकर दिग्विजय सिंह ने कहा कि भाजपा नेता विजय शाह के बयान से साफ है कि भाजपा की सोच क्या है। संघी ट्रोल आर्मी ने इस मुद्दे को ट्रोल किया और भाजपा ने विजय शाह पर कोई कार्यवाही नहीं की। संघी विचारधारा शाह के बयान में भी साफ नजर आती है दिग्विजय सिंह ने कहा कि कर्नल सोफिया कुरैशी को प्रवक्ता बनाए जाने पर भाजपा के नेताओं में होड़ मच गई कि हर मुद्दे को हिंदू-मुस्लिम रंग दिया जाए। भाजपा की ट्रोल आर्मी ने सिर्फ सोफिया कुरैशी ही नहीं, बल्कि भारत सरकार के प्रवक्ता विक्रम जीत और उनके परिवार को भी नहीं छोड़ा। सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ जहर उगला गया और दुख की बात यह है कि इन ट्रोल्स को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद फॉलो करते हैं। यह भाजपा की संघी विचारधारा को उजागर करता है, जो विजय शाह के बयान में भी साफ नजर आती है। अचानक सीजफायर का निर्णय कैसे? सीजफायर के मुद्दे पर भी दिग्विजय सिंह ने मोदी सरकार को घेरा। उन्होंने सवाल उठाया कि मोदी सरकार ने पाकिस्तान के साथ अचानक सीजफायर का निर्णय कैसे कर लिया? उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान के बाद पाकिस्तान के डीजीएमओ ने भारत के डीजीएमओ को सीजफायर की पेशकश की और सवाल उठाया कि इसके बाद भी सीजफायर का उल्लंघन क्यों हुआ? मोदी सरकार विपक्ष को विश्वास में लेने से डरती दिग्विजय सिंह ने कहा कि संकट के समय देश एकजुट होकर सेना के साथ है, लेकिन मोदी सरकार विपक्ष को विश्वास में लेने से डरती है। जबकि अटल बिहारी वाजपेयी के कहने पर जब चीन से युद्ध हुआ था तब सदन बुलाया गया था और विपक्ष के साथ बैठकर चर्चा हुई थी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विपक्ष के साथ बैठकर चर्चा करना थी लेकिन प्रधानमंत्री विपक्ष के साथ बैठकर चर्चा करने से डरते हैं।