आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज को इंदौर हाईकोर्ट का नोटिस:मेडिकल छात्रा ने जमा किए 81 लाख लेकिन प्री-पीजी परीक्षा में शामिल होने पर रोक
आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज को इंदौर हाईकोर्ट का नोटिस:मेडिकल छात्रा ने जमा किए 81 लाख लेकिन प्री-पीजी परीक्षा में शामिल होने पर रोक
पीजी सीट छोड़ने पर मेडिकल छात्रा के द्वारा 81 लाख रुपए मेडिकल कॉलेज में जमा किए गए लेकिन इसके बावजूद उसके प्री-पीजी परीक्षा में शामिल होने पर रोक है। छात्रा ने इसके खिलाफ इंदौर हाईकोर्ट में याचिका लगाई और इसमें सुनवाई जारी है। गुरुवार को सुनवाई के बाद अगले सप्ताह केस में अब अंतिम बहस होगी। मेडिकल कॉलेज से जवाब मांगा गया है। न्यायमूर्ति वी के शुक्ला की अध्यक्षता वाली इंदौर पीठ डीबी 1 ने आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज (निजी मेडिकल कॉलेज) उज्जैन को नोटिस जारी किया है। अब मामले को अंतिम बहस के लिए 12 सितंबर को सूचीबद्ध किया है। याचिकाकर्ता रितिका माहेश्वरी की ओर से अधिवक्ता आदित्य संघी ने बहस की। तात्कालिकता को देखते हुए क्योंकि याचिकाकर्ता ने पहले ही पीजी सीट की पूरी फीस के रूप में 81 लाख रुपए जमा कर दिए हैं, लेकिन अब प्राइवेट मेडिकल कॉलेज और डीएमई के अनुसार वह सीट छोड़ने के नियमों के अनुसार 3 साल तक प्री पीजी परीक्षा में शामिल नहीं हो सकती है। अधिवक्ता आदित्य सांघी ने तर्क दिया कि नियम अवैध और मनमाना है और भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 19 से प्रभावित है और इसे अल्ट्रा वायर्स के रूप में रद्द किया जाना चाहिए। एक गलती, दो सजा को लेकर छात्रा का यह है तर्क इंदौर के आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में NRI कैटेगरी में छात्रा डॉ. रितिका माहेश्वरी ने MBBS के बाद पीजी एग्जाम दिया था। 2022 में पीजी कोर्स में एडमिशन मिल गया। बाद में व्यक्तिगत कारण बताकर डॉ. रितिका ने यह सीट खाली कर दी। सरकार का नियम है कि सरकारी या प्राइवेट कॉलेज में सिलेक्शन के बाद सीट खाली करने पर खर्च स्टूडेंट ही उठाएगा। साथ ही अगले तीन साल तक वह इस एग्जाम की काउंसलिंग में बैन रहेगा। बीच में सीट खाली करने पर डॉ. रितिका के परिवार ने 81 लाख रुपए हर्जाने में भर दिए।
पीजी सीट छोड़ने पर मेडिकल छात्रा के द्वारा 81 लाख रुपए मेडिकल कॉलेज में जमा किए गए लेकिन इसके बावजूद उसके प्री-पीजी परीक्षा में शामिल होने पर रोक है। छात्रा ने इसके खिलाफ इंदौर हाईकोर्ट में याचिका लगाई और इसमें सुनवाई जारी है। गुरुवार को सुनवाई के बाद अगले सप्ताह केस में अब अंतिम बहस होगी। मेडिकल कॉलेज से जवाब मांगा गया है। न्यायमूर्ति वी के शुक्ला की अध्यक्षता वाली इंदौर पीठ डीबी 1 ने आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज (निजी मेडिकल कॉलेज) उज्जैन को नोटिस जारी किया है। अब मामले को अंतिम बहस के लिए 12 सितंबर को सूचीबद्ध किया है। याचिकाकर्ता रितिका माहेश्वरी की ओर से अधिवक्ता आदित्य संघी ने बहस की। तात्कालिकता को देखते हुए क्योंकि याचिकाकर्ता ने पहले ही पीजी सीट की पूरी फीस के रूप में 81 लाख रुपए जमा कर दिए हैं, लेकिन अब प्राइवेट मेडिकल कॉलेज और डीएमई के अनुसार वह सीट छोड़ने के नियमों के अनुसार 3 साल तक प्री पीजी परीक्षा में शामिल नहीं हो सकती है। अधिवक्ता आदित्य सांघी ने तर्क दिया कि नियम अवैध और मनमाना है और भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 19 से प्रभावित है और इसे अल्ट्रा वायर्स के रूप में रद्द किया जाना चाहिए। एक गलती, दो सजा को लेकर छात्रा का यह है तर्क इंदौर के आरडी गार्डी मेडिकल कॉलेज में NRI कैटेगरी में छात्रा डॉ. रितिका माहेश्वरी ने MBBS के बाद पीजी एग्जाम दिया था। 2022 में पीजी कोर्स में एडमिशन मिल गया। बाद में व्यक्तिगत कारण बताकर डॉ. रितिका ने यह सीट खाली कर दी। सरकार का नियम है कि सरकारी या प्राइवेट कॉलेज में सिलेक्शन के बाद सीट खाली करने पर खर्च स्टूडेंट ही उठाएगा। साथ ही अगले तीन साल तक वह इस एग्जाम की काउंसलिंग में बैन रहेगा। बीच में सीट खाली करने पर डॉ. रितिका के परिवार ने 81 लाख रुपए हर्जाने में भर दिए।