शहडोल में जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम में वर्चुअली जुड़ेंगे PM:15 नवंबर को बिरसा मुंडा जयंती पर धार में गर्वनर, सीएम की मौजूदगी में होगा समारोह
शहडोल में जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम में वर्चुअली जुड़ेंगे PM:15 नवंबर को बिरसा मुंडा जयंती पर धार में गर्वनर, सीएम की मौजूदगी में होगा समारोह
15 नवंबर को बिरसा मुंडा जयंती के मौके पर मप्र में दो बड़े आयोजन होंगे। आदिवासी नायक बिरसा मुंडा की 149वीं जयंती के मौके पर मप्र में अवकाश भी रहेगा। इस दिन शहडोल और धार में दो बडे़ आयोजन मप्र सरकार की ओर से होंगे। पीएम मोदी शहडोल में वर्चुअल जुड़ेंगे
शहडोल में होने वाले कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वर्चुअल जुड़ेंगे। सुबह 11 बजे से होने वाले कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ल, सांसद हिमाद्रि सिंह सहित तमाम स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। धार में गर्वनर और सीएम की मौजूदगी में होगा कार्यक्रम
बिरसा मुंड़ा जयंती के मौके पर होने वाले जनजातीय गौरव दिवस का राज्य स्तरीय कार्यक्रम धार में होगा। इस कार्यक्रम में राज्यपाल मंगू भाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह, धार सांसद व केन्द्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर और विधायकों के साथ जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। आदिवासी वर्ग के लिए हो सकती हैं घोषणाएं
जनजातीय गौरव दिवस के मौके पर होने वाले कार्यक्रमों में आदिवासी वर्ग के लिए कई बड़े ऐलान हो सकते हैं। आदिवासी युवाओं के लिए स्वरोजगार को लेकर नई योजना शुरू करने का भी ऐलान हो सकता है। इसके साथ ही वन क्षेत्रों में टूरिज्म बढ़ाने की दृष्टि से भी आदिवासी वर्ग के लिए योजना का ऐलान हो सकता है। झारखंड में हुआ था बिरसा मुंडा का जन्म
बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवम्बर 1875 को झारखंड के उलीहातू गांव में एक साधारण मुंडा परिवार में हुआ था। उनका जीवन बेहद कठिनाइयों से भरा था और उन्हें बाल्यावस्था से ही आर्थिक संघर्ष का सामना करना पड़ा। सामाजिक असमानता, अत्याचार और विदेशी शासकों द्वारा जनजातियों पर निरंतर हो रहे शोषण ने बिरसा मुंडा के अंतर्मन को विद्रोह की भावना से भर दिया। उन्होंने अंग्रेजों द्वारा लागू जमींदारी प्रथा, धर्मांतरण और जनजातियों के पारंपरिक जीवन पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ संघर्ष किया। भगवान बिरसा मुंडा का जीवन जनजातीय समाज की उन्नति और उनके अधिकारों के लिए समर्पित रहा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा 15 नवम्बर 2021 को "राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस" घोषित किया । उलगुलान आंदोलन का नेतृत्व
बिरसा मुंडा ने "उलगुलान" नामक जनजातीय विद्रोह का नेतृत्व किया, जो अंग्रेजी शासन और उनके द्वारा किए जा रहे अत्याचार के खिलाफ था। "उलगुलान" का अर्थ है 'महान विद्रोह'। इस आंदोलन का उद्देश्य अंग्रेजों द्वारा लागू की गई भूमि नीतियों, जबरन धर्मांतरण और जनजातियों की पारंपरिक जीवन शैली में दखल देने वाले कानूनों के खिलाफ आवाज उठाना था। भगवान बिरसा मुंडा के नेतृत्व में इस आंदोलन ने पूरे क्षेत्र में जन क्रांति की लहर पैदा कर दी और उन्हें "धरती आबा" या धरती का पुत्र के रूप में सम्मानित किया जाने लगा।
15 नवंबर को बिरसा मुंडा जयंती के मौके पर मप्र में दो बड़े आयोजन होंगे। आदिवासी नायक बिरसा मुंडा की 149वीं जयंती के मौके पर मप्र में अवकाश भी रहेगा। इस दिन शहडोल और धार में दो बडे़ आयोजन मप्र सरकार की ओर से होंगे। पीएम मोदी शहडोल में वर्चुअल जुड़ेंगे
शहडोल में होने वाले कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वर्चुअल जुड़ेंगे। सुबह 11 बजे से होने वाले कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ल, सांसद हिमाद्रि सिंह सहित तमाम स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। धार में गर्वनर और सीएम की मौजूदगी में होगा कार्यक्रम
बिरसा मुंड़ा जयंती के मौके पर होने वाले जनजातीय गौरव दिवस का राज्य स्तरीय कार्यक्रम धार में होगा। इस कार्यक्रम में राज्यपाल मंगू भाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह, धार सांसद व केन्द्रीय राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर और विधायकों के साथ जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। आदिवासी वर्ग के लिए हो सकती हैं घोषणाएं
जनजातीय गौरव दिवस के मौके पर होने वाले कार्यक्रमों में आदिवासी वर्ग के लिए कई बड़े ऐलान हो सकते हैं। आदिवासी युवाओं के लिए स्वरोजगार को लेकर नई योजना शुरू करने का भी ऐलान हो सकता है। इसके साथ ही वन क्षेत्रों में टूरिज्म बढ़ाने की दृष्टि से भी आदिवासी वर्ग के लिए योजना का ऐलान हो सकता है। झारखंड में हुआ था बिरसा मुंडा का जन्म
बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवम्बर 1875 को झारखंड के उलीहातू गांव में एक साधारण मुंडा परिवार में हुआ था। उनका जीवन बेहद कठिनाइयों से भरा था और उन्हें बाल्यावस्था से ही आर्थिक संघर्ष का सामना करना पड़ा। सामाजिक असमानता, अत्याचार और विदेशी शासकों द्वारा जनजातियों पर निरंतर हो रहे शोषण ने बिरसा मुंडा के अंतर्मन को विद्रोह की भावना से भर दिया। उन्होंने अंग्रेजों द्वारा लागू जमींदारी प्रथा, धर्मांतरण और जनजातियों के पारंपरिक जीवन पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ संघर्ष किया। भगवान बिरसा मुंडा का जीवन जनजातीय समाज की उन्नति और उनके अधिकारों के लिए समर्पित रहा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा 15 नवम्बर 2021 को "राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस" घोषित किया । उलगुलान आंदोलन का नेतृत्व
बिरसा मुंडा ने "उलगुलान" नामक जनजातीय विद्रोह का नेतृत्व किया, जो अंग्रेजी शासन और उनके द्वारा किए जा रहे अत्याचार के खिलाफ था। "उलगुलान" का अर्थ है 'महान विद्रोह'। इस आंदोलन का उद्देश्य अंग्रेजों द्वारा लागू की गई भूमि नीतियों, जबरन धर्मांतरण और जनजातियों की पारंपरिक जीवन शैली में दखल देने वाले कानूनों के खिलाफ आवाज उठाना था। भगवान बिरसा मुंडा के नेतृत्व में इस आंदोलन ने पूरे क्षेत्र में जन क्रांति की लहर पैदा कर दी और उन्हें "धरती आबा" या धरती का पुत्र के रूप में सम्मानित किया जाने लगा।