शाजापुर भाजपा में सत्ता और संगठन का खेल:कौन बनेगा जिला अध्यक्ष?; गुटबाजी में महिला को मिल सकती है कमान

शाजापुर भाजपा जिलाध्यक्ष के लिए गुटबाजी चरम पर है। दो गुटों में बंटी भाजपा जिलाध्यक्ष का निर्णय नहीं कर पा रही है। मंत्री इंदर सिंह परमार जहां वर्तमान जिला महामंत्री विजय सिंह बैस को जिला अध्यक्ष बनाने पर अड़े हुए हैं। वहीं सांसद महेन्द्र सिंह सौलंकी, शाजापुर विधायक अरुण भीमावद और कालापीपल विधायक घनश्याम चन्द्रवंशी भाजपा जिला उपाध्यक्ष रवि पांडे के नाम पर एकजुट होकर उन्हें जिला अध्यक्ष बनाने में लगे हुए हैं। भोपाल में भी शाजापुर जिला अध्यक्ष के लिए जिले के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हो चुकी है, लेकिन कोई निर्णय नहीं हुआ। शाजापुर में भी जिला अध्यक्ष पद के लिए पेंच फंस गया है। पार्टी के संगठन स्तर पर अब किसी तीसरे नाम पर सहमति बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। भाजपा सहमति के नाम पर महिला को भी जिला अध्यक्ष की कमान सौंप सकती है। महिलाओं में चेतना शर्मा और केतल पटेल में से किसी एक नाम पर सहमति बन सकती है। इसके अलावा अनुसूचित जाति से संतोष बराड़ा और पार्षद दिनेश सोराष्ट्रीय के नामों पर भी पार्टी स्तर पर चर्चा हो रही है। भाजपा आरएसएस के नाम पर भी विचार कर सकती हैं। गुटबाजी में उलझी भाजपा शाजापुर जिले में भाजपा गुटबाजी में उलझी हुई है। गुटबाजी का असर पार्टी के हर कार्यक्रम में देखा जा रहा है। सीएम के शाजापुर आगमन पर भी पार्टी में गुटबाजी देखने को मिली थी और उसमें सीएम को हस्तक्षेप करना पड़ा। भाजपा में जिले की राजनीति में प्रमुख रूप से दो गुट है। एक गुट मंत्री इंदरसिंह परमार का ओर दूसरे गुटे में सांसद महेन्द्र सिंह सौलंकी, शाजापुर विधायक अरुण भीमावद और कालापीपल विधायक घनश्याम चन्द्रवंशी शामिल हैं। सांसद और दोनों विधायक मंत्री परमार गुट को कमजोर करने के लिए एकजुट हुए हैं। सांसद सौलंकी कुछ मामलों में मंत्री परमार के साथ खड़े नजर आते हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष में भी अंतिम समय में सांसद सौलंकी मंत्री परमार के साथ खड़े होकर किसी तीसरे नाम पर मोहर लगा सकते हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष पद के लिए सांसद की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। तीसरे नाम की होगी घोषणा भाजपा जिलाध्यक्ष पद के लिए विजय सिंह बैस और रवि पांडे के नाम गुटबाजी में उलझ कर रह गए हैं। इन दोनों में से किसी एक नाम पर भी सहमति बनना मुश्किल है। पार्टी इन दोनों को छोड़कर अब तीसरे नाम पर विचार कर रही है। पार्टी दोनों गुटों में सहमति बनाकर जिला अध्यक्ष की घोषणा कर सकती हैं। जिला अध्यक्ष संगठन की गाइड लाइन से होता है तय भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक पुरुषोत्तम चंद्रवंशी ने भाजपा जिलाध्यक्ष को लेकर कहा पार्टी में गुटबाजी तो नहीं है लेकिन हर कार्यकर्ता पद पर काबिज होना चाहता है। पार्टी का असली कार्यकर्ता वहीं है जो गुटबाजी में न उलझकर पार्टी के प्रति समर्पित रहे और पार्टी का काम करें। भाजपा ने इस बार जिला अध्यक्ष के लिए पांच दावेदारों के नाम रायशुमारी से मांगे थे। पांच नामों का पैनल बनाकर भेज दिया, जिसमें महिला और अनुसूचित जाति के दावेदार भी शामिल हैं। संगठन इस बार छोटे जिलों में महिलाओं को अध्यक्ष बनाने जा रहा है। शाजापुर जिले में भी महिला को अध्यक्ष बनाया जा सकता है। भाजपा का जिला अध्यक्ष पार्टी की गाइड लाइन से बनेगा। जिला अध्यक्ष को संगठन चलाना है और संगठन के आदेश का पालन करना है।

शाजापुर भाजपा में सत्ता और संगठन का खेल:कौन बनेगा जिला अध्यक्ष?; गुटबाजी में महिला को मिल सकती है कमान
शाजापुर भाजपा जिलाध्यक्ष के लिए गुटबाजी चरम पर है। दो गुटों में बंटी भाजपा जिलाध्यक्ष का निर्णय नहीं कर पा रही है। मंत्री इंदर सिंह परमार जहां वर्तमान जिला महामंत्री विजय सिंह बैस को जिला अध्यक्ष बनाने पर अड़े हुए हैं। वहीं सांसद महेन्द्र सिंह सौलंकी, शाजापुर विधायक अरुण भीमावद और कालापीपल विधायक घनश्याम चन्द्रवंशी भाजपा जिला उपाध्यक्ष रवि पांडे के नाम पर एकजुट होकर उन्हें जिला अध्यक्ष बनाने में लगे हुए हैं। भोपाल में भी शाजापुर जिला अध्यक्ष के लिए जिले के वरिष्ठ नेताओं की बैठक हो चुकी है, लेकिन कोई निर्णय नहीं हुआ। शाजापुर में भी जिला अध्यक्ष पद के लिए पेंच फंस गया है। पार्टी के संगठन स्तर पर अब किसी तीसरे नाम पर सहमति बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। भाजपा सहमति के नाम पर महिला को भी जिला अध्यक्ष की कमान सौंप सकती है। महिलाओं में चेतना शर्मा और केतल पटेल में से किसी एक नाम पर सहमति बन सकती है। इसके अलावा अनुसूचित जाति से संतोष बराड़ा और पार्षद दिनेश सोराष्ट्रीय के नामों पर भी पार्टी स्तर पर चर्चा हो रही है। भाजपा आरएसएस के नाम पर भी विचार कर सकती हैं। गुटबाजी में उलझी भाजपा शाजापुर जिले में भाजपा गुटबाजी में उलझी हुई है। गुटबाजी का असर पार्टी के हर कार्यक्रम में देखा जा रहा है। सीएम के शाजापुर आगमन पर भी पार्टी में गुटबाजी देखने को मिली थी और उसमें सीएम को हस्तक्षेप करना पड़ा। भाजपा में जिले की राजनीति में प्रमुख रूप से दो गुट है। एक गुट मंत्री इंदरसिंह परमार का ओर दूसरे गुटे में सांसद महेन्द्र सिंह सौलंकी, शाजापुर विधायक अरुण भीमावद और कालापीपल विधायक घनश्याम चन्द्रवंशी शामिल हैं। सांसद और दोनों विधायक मंत्री परमार गुट को कमजोर करने के लिए एकजुट हुए हैं। सांसद सौलंकी कुछ मामलों में मंत्री परमार के साथ खड़े नजर आते हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष में भी अंतिम समय में सांसद सौलंकी मंत्री परमार के साथ खड़े होकर किसी तीसरे नाम पर मोहर लगा सकते हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष पद के लिए सांसद की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। तीसरे नाम की होगी घोषणा भाजपा जिलाध्यक्ष पद के लिए विजय सिंह बैस और रवि पांडे के नाम गुटबाजी में उलझ कर रह गए हैं। इन दोनों में से किसी एक नाम पर भी सहमति बनना मुश्किल है। पार्टी इन दोनों को छोड़कर अब तीसरे नाम पर विचार कर रही है। पार्टी दोनों गुटों में सहमति बनाकर जिला अध्यक्ष की घोषणा कर सकती हैं। जिला अध्यक्ष संगठन की गाइड लाइन से होता है तय भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक पुरुषोत्तम चंद्रवंशी ने भाजपा जिलाध्यक्ष को लेकर कहा पार्टी में गुटबाजी तो नहीं है लेकिन हर कार्यकर्ता पद पर काबिज होना चाहता है। पार्टी का असली कार्यकर्ता वहीं है जो गुटबाजी में न उलझकर पार्टी के प्रति समर्पित रहे और पार्टी का काम करें। भाजपा ने इस बार जिला अध्यक्ष के लिए पांच दावेदारों के नाम रायशुमारी से मांगे थे। पांच नामों का पैनल बनाकर भेज दिया, जिसमें महिला और अनुसूचित जाति के दावेदार भी शामिल हैं। संगठन इस बार छोटे जिलों में महिलाओं को अध्यक्ष बनाने जा रहा है। शाजापुर जिले में भी महिला को अध्यक्ष बनाया जा सकता है। भाजपा का जिला अध्यक्ष पार्टी की गाइड लाइन से बनेगा। जिला अध्यक्ष को संगठन चलाना है और संगठन के आदेश का पालन करना है।