शिक्षा मंत्री के बंगले के बाहर डटे सैकड़ों अतिथि शिक्षक

छत्तीसगढ़ संवाददाता भिलाई नगर, 21 जुलाई। छत्तीसगढ़ के एक हजार से अधिक अतिथि शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। पिछले 20 दिनों से लगातार जारी धरने के बाद, शिक्षकों ने अब स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के दुर्ग स्थित निवास का घेराव कर अपनी मांगों पर तत्काल फैसला लेने की अपील की है। बारिश में रैली और रातभर सड़क पर डेरा सोमवार को बारिश के बावजूद शिक्षकों ने रैली निकाली और शाम को मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाकर अनोखा विरोध जताया। मांगें पूरी न होने पर शिक्षकों ने देर रात शिक्षा मंत्री के बंगले के बाहर ही सड़क पर गुजार दी। शिक्षकों का कहना है कि वे किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहे, बल्कि केवल संविलियन, सेवा सुरक्षा और समान कार्य के लिए समान वेतन चाहते हैं। 20 हजार का मानदेय और आर्थिक तंगी का संकट राज्य अतिथि शिक्षक संघ के संरक्षक धर्मेंद्र दास वैष्णव ने आर्थिक तंगी बयां करते हुए कहा कि उन्हें हर महीने केवल 20 हजार रुपये मानदेय मिलता है। इतने कम पैसों में मकान किराया, बिजली-पानी का बिल, आने-जाने का खर्च और परिवार की जिम्मेदारी उठाना नामुमकिन हो गया है। कई बार ऐसी नौबत आ जाती है कि अपने बुजुर्ग माता-पिता की मदद करने के बजाय उनसे ही पैसे मांगने पड़ते हैं। नक्सल क्षेत्रों में कलम थमाई, पर खुद का भविष्य अंधकार में धर्मेंद्र दास वैष्णव ने कहा कि वह पिछले 11 वर्षों से कोंडागांव जिले के केशकाल ब्लॉक स्थित एक नक्सल प्रभावित गांव के स्कूल में पढ़ा रहे हैं। शिक्षकों ने दुर्गम और अत्यंत संवेदनशील इलाकों में बच्चों को शिक्षित कर डॉक्टर, इंजीनियर और वकील बनाया है, जहां कभी सड़कें तक नहीं थीं। हमने बंदूक की जगह कलम पकडऩा सिखाया और नक्सलवाद को खत्म करने में भूमिका निभाई, लेकिन सरकार पिछले 11 साल से हमारा शोषण कर रही है। आत्मानंद और विवेकानंद स्कूलों की तर्ज पर मिले सुविधाएं शिक्षकों का आरोप है कि पिछली सरकार ने स्वामी आत्मानंद स्कूलों के अतिथि शिक्षकों को बेहतर वेतन (38 हजार रूपये) और छुट्टियां दी थीं। वर्तमान सरकार विवेकानंद स्कूलों में भी वैसी ही व्यवस्था कर रही है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि वर्षों से सुदूर इलाकों में सेवाएं दे रहे इन अतिथि शिक्षकों को भी वही अधिकार और सुविधाएं प्रदान की जाएं। खून से लिखा पत्र और इच्छामृत्यु की चेतावनी ज्ञात हो कि शिक्षकों के आंदोलन का रुख बेहद संवेदनशील हो चुका है। इससे पूर्व अतिथि शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री के नाम अपने खून से पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की मांग तक कर डाली थी। उनका कहना था कि यदि सरकार उनके भविष्य को सुरक्षित नहीं कर सकती, तो उन्हें सम्मान से जीने का अधिकार भी नहीं मिल रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आश्वासन सोमवार को दुर्ग पहुंचे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विद्या मितान/अतिथि शिक्षकों के मामले में जांच के बाद जो भी न्यायसंगत और सही निर्णय होगा, वह सरकार द्वारा लिया जाएगा।

शिक्षा मंत्री के बंगले के बाहर डटे सैकड़ों अतिथि शिक्षक
छत्तीसगढ़ संवाददाता भिलाई नगर, 21 जुलाई। छत्तीसगढ़ के एक हजार से अधिक अतिथि शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। पिछले 20 दिनों से लगातार जारी धरने के बाद, शिक्षकों ने अब स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के दुर्ग स्थित निवास का घेराव कर अपनी मांगों पर तत्काल फैसला लेने की अपील की है। बारिश में रैली और रातभर सड़क पर डेरा सोमवार को बारिश के बावजूद शिक्षकों ने रैली निकाली और शाम को मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाकर अनोखा विरोध जताया। मांगें पूरी न होने पर शिक्षकों ने देर रात शिक्षा मंत्री के बंगले के बाहर ही सड़क पर गुजार दी। शिक्षकों का कहना है कि वे किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहे, बल्कि केवल संविलियन, सेवा सुरक्षा और समान कार्य के लिए समान वेतन चाहते हैं। 20 हजार का मानदेय और आर्थिक तंगी का संकट राज्य अतिथि शिक्षक संघ के संरक्षक धर्मेंद्र दास वैष्णव ने आर्थिक तंगी बयां करते हुए कहा कि उन्हें हर महीने केवल 20 हजार रुपये मानदेय मिलता है। इतने कम पैसों में मकान किराया, बिजली-पानी का बिल, आने-जाने का खर्च और परिवार की जिम्मेदारी उठाना नामुमकिन हो गया है। कई बार ऐसी नौबत आ जाती है कि अपने बुजुर्ग माता-पिता की मदद करने के बजाय उनसे ही पैसे मांगने पड़ते हैं। नक्सल क्षेत्रों में कलम थमाई, पर खुद का भविष्य अंधकार में धर्मेंद्र दास वैष्णव ने कहा कि वह पिछले 11 वर्षों से कोंडागांव जिले के केशकाल ब्लॉक स्थित एक नक्सल प्रभावित गांव के स्कूल में पढ़ा रहे हैं। शिक्षकों ने दुर्गम और अत्यंत संवेदनशील इलाकों में बच्चों को शिक्षित कर डॉक्टर, इंजीनियर और वकील बनाया है, जहां कभी सड़कें तक नहीं थीं। हमने बंदूक की जगह कलम पकडऩा सिखाया और नक्सलवाद को खत्म करने में भूमिका निभाई, लेकिन सरकार पिछले 11 साल से हमारा शोषण कर रही है। आत्मानंद और विवेकानंद स्कूलों की तर्ज पर मिले सुविधाएं शिक्षकों का आरोप है कि पिछली सरकार ने स्वामी आत्मानंद स्कूलों के अतिथि शिक्षकों को बेहतर वेतन (38 हजार रूपये) और छुट्टियां दी थीं। वर्तमान सरकार विवेकानंद स्कूलों में भी वैसी ही व्यवस्था कर रही है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि वर्षों से सुदूर इलाकों में सेवाएं दे रहे इन अतिथि शिक्षकों को भी वही अधिकार और सुविधाएं प्रदान की जाएं। खून से लिखा पत्र और इच्छामृत्यु की चेतावनी ज्ञात हो कि शिक्षकों के आंदोलन का रुख बेहद संवेदनशील हो चुका है। इससे पूर्व अतिथि शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री के नाम अपने खून से पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की मांग तक कर डाली थी। उनका कहना था कि यदि सरकार उनके भविष्य को सुरक्षित नहीं कर सकती, तो उन्हें सम्मान से जीने का अधिकार भी नहीं मिल रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का आश्वासन सोमवार को दुर्ग पहुंचे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विद्या मितान/अतिथि शिक्षकों के मामले में जांच के बाद जो भी न्यायसंगत और सही निर्णय होगा, वह सरकार द्वारा लिया जाएगा।