कलेक्टर ने किसानों से की अपील:डीएपी के स्थान पर एनपीके उर्वरक का करे उपयोग, भूमि में नाइट्रोजन, पोटाश और फास्फोरस की होती है पूर्ति
कलेक्टर ने किसानों से की अपील:डीएपी के स्थान पर एनपीके उर्वरक का करे उपयोग, भूमि में नाइट्रोजन, पोटाश और फास्फोरस की होती है पूर्ति
उमरिया में किसानों से भूमि में उर्वरक का उपयोग करने के लिए कलेक्टर ने अपील की है। कलेक्टर ने किसानों से डीएपी के स्थान पर एनपी उर्वरक का उपयोग भूमि के लिए अधिक उपयोगी बताया है। कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन ने उमरिया क्षेत्र के किसानों से डीएपी के स्थान पर एनपीके उर्वरक उपयोग किए जाने की अपील की है। डीएपी से नाइट्रोजन और फास्फोरस की पूर्ति होती है। जबकि एनपीके में नाइट्रोजन, पोटाश और फास्फोरस होता है। किसान एनपीके का उपयोग कर बेहतर फसल उत्पादन प्राप्त कर सकता है। एनपीके उर्वरकों से फसलों में मुख्य पोषक तत्व, नत्रजन, फास्फोरस और पोटाश तत्व के साथ नाईट्रोजन, फास्फोरस और सल्फर की पूर्ति भी होती है। डीएपी से पूर्ति नहीं एनपी में पर्याप्त तत्व डीएपी से केवल दो तत्व फसलों को मिलते है। डीएपी से पोटाश तत्व की पूर्ति नहीं होती है। एन पी मे सिंगल सुपर फास्फेट, नाइट्रोजन,पोटाश और फास्फोरस , सल्फर और कैल्शियम पाया जाता है। इसके उपयोग से फसलों के उत्पादन में वृद्धि होती है। जिले में रबी 2024 में मुख्य फसल गेंहू, चना, सरसो और मसूर है। इसके लिए एनपीके उर्वरक का उपयोग किया जा सकता है। वर्तमान में डीएपी और एनपी के उर्वरक 940 मैट्रिक टन उपलब्ध है। एनपी का अधिक से अधिक उपयोग कर बेहतर फसल उत्पादन किया जा सकता है। संतुलित उर्वरक का उपयोग करने से फसलों में कीड़े बीमारियों का भी प्रकोप कम होता है। फसल लागत कम आती है।
उमरिया में किसानों से भूमि में उर्वरक का उपयोग करने के लिए कलेक्टर ने अपील की है। कलेक्टर ने किसानों से डीएपी के स्थान पर एनपी उर्वरक का उपयोग भूमि के लिए अधिक उपयोगी बताया है। कलेक्टर धरणेन्द्र कुमार जैन ने उमरिया क्षेत्र के किसानों से डीएपी के स्थान पर एनपीके उर्वरक उपयोग किए जाने की अपील की है। डीएपी से नाइट्रोजन और फास्फोरस की पूर्ति होती है। जबकि एनपीके में नाइट्रोजन, पोटाश और फास्फोरस होता है। किसान एनपीके का उपयोग कर बेहतर फसल उत्पादन प्राप्त कर सकता है। एनपीके उर्वरकों से फसलों में मुख्य पोषक तत्व, नत्रजन, फास्फोरस और पोटाश तत्व के साथ नाईट्रोजन, फास्फोरस और सल्फर की पूर्ति भी होती है। डीएपी से पूर्ति नहीं एनपी में पर्याप्त तत्व डीएपी से केवल दो तत्व फसलों को मिलते है। डीएपी से पोटाश तत्व की पूर्ति नहीं होती है। एन पी मे सिंगल सुपर फास्फेट, नाइट्रोजन,पोटाश और फास्फोरस , सल्फर और कैल्शियम पाया जाता है। इसके उपयोग से फसलों के उत्पादन में वृद्धि होती है। जिले में रबी 2024 में मुख्य फसल गेंहू, चना, सरसो और मसूर है। इसके लिए एनपीके उर्वरक का उपयोग किया जा सकता है। वर्तमान में डीएपी और एनपी के उर्वरक 940 मैट्रिक टन उपलब्ध है। एनपी का अधिक से अधिक उपयोग कर बेहतर फसल उत्पादन किया जा सकता है। संतुलित उर्वरक का उपयोग करने से फसलों में कीड़े बीमारियों का भी प्रकोप कम होता है। फसल लागत कम आती है।