ऑल डिपार्टमेंट आउटसोर्स, अस्थाई कर्मचारी मोर्चा ने जताया विरोध:आउटसोर्स, अस्थाई कर्मचारियों ने कर्ज लेकर मनाया त्योहार : वासुदेव शर्मा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिवाली त्योहार के मद्देनजर प्रदेश के कर्मचारियों को अक्टूबर का वेतन 4 दिन पहले दे दिया। उन्होंने अनियमित कर्मचारियों को भी दिवाली से पहले वेतन देने को कहा था, पर अस्थाई और आउटसोर्स कर्मचारियों के मामले में ऐसा नहीं हुआ। इन कर्मचारियों को अब तक वेतन नहीं मिला है। ऑल डिपार्टमेंट आउटसोर्स, अस्थाई कर्मचारी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने आरोप लगाया कि कंपनी प्रबंधकों एवं अधिकारियों ने मिलकर मुख्यमंत्री की घोषणा पर अमल नहीं होने दिया। शर्मा ने कहा कि दिवाली पर प्रदेश के लाखों आउटसोर्स, अस्थाई कर्मचारियों की जेब खाली रहीं। उन्होंने कर्ज लेकर घरों में दिए जलाए, बच्चों के लिए मिठाई और फटाखे लाए। वेतन नहीं मिलने से दिवाली पर नए कपड़े लेने की इच्छा पूरी नहीं कर सके। मुख्यमंत्री की घोषणा स्कूलों, छात्रावासों, पंचायतों के चपरासियों, चौकीदारों, निकायों के सफाई कर्मियों तक को दिवाली पर वेतन नहीं दिला सकी। ग्राम पंचायतों में कार्यरत चौकीदार, भृत्य, पंप आपरेटर, सफाई कर्मियों को भी दिवाली पर वेतन दिलाने में सरकार असफल रही। त्योहार के दिन हड़ताल, दिए ज्ञापन शर्मा ने बताया कि वेतन से वंचित अस्पतालों के कर्मचारियों ने दिवाली के दिन ग्वालियर, रीवा में हड़ताल की। जिलों में दिवाली से पहले वेतन देने के प्रमुख सचिवों के आदेशों को लेकर कलेक्टरों को ज्ञापन दिए गए, लेकिन कंपनी प्रबंधन और अधिकारियों ने उन आदेशों पर अमल करना तो दूर, पढ़ना भी जरूरी नहीं समझा, उल्टे वेतन मांगने पहुंचे आउटसोर्स कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की धमकी दी। रीवा में मेडिकल कॉलेज के शिवेंग्र पांडे, विपिन पांडे सहित पांच कर्मियों को नौकरी से निकाल दिया गया। बैतूल में जिला अस्पताल की महिला कर्मचारी अनिता पाल को वेतन मांगने की सजा गालियां खाकर चुकानी पड़ी।शिक्षा विभाग में नहीं हुआ अमल दिवाली से पूर्व वेतन देने की मुख्यमंत्री की घोषणा पर शिक्षा विभाग में अमल नहीं हुआ, जबकि इस विभाग में बड़ी संख्या में आउटसोर्स, अस्थाई कर्मचारी काम करते हैं। शर्मा ने कहा कि स्कूलों, डीईओ, डीपीसी, बीईओ, बीआरसी कार्यालयों एवं छात्रावासों में बड़ी संख्या में कंप्यूटर आपरेटर, भृत्य, चौकीदार, सफाईकर्मी, रसोईया काम करते हैं, दिवाली पर इन्हें वेतन नहीं मिला, जबकि इन्हें दिवाली से पहले वेतन देने के लिए डीपीआई ने भी आदेश निकाला था। इतना ही नहीं स्कूलों में पढ़ाने वाले आउटसोर्स व्यावसायिक प्रशिक्षक, अस्थाई अतिथि शिक्षकों को भी दिवाली पर वेतन नहीं दिया गया, जिससे इनके अंदर गुस्सा है। स्वास्थ्य, आयुष विभाग में भी नहीं हुआ वेतन शर्मा ने बताया कि जिला अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, आयुष विभाग के योग प्रशिक्षक, वार्ड वाय, सुरक्षा गार्डों, सफाईकर्मी आदि को समय पर वेतन नहीं मिला, इस विभाग में तो 4-5 महीने का वेतन बकाया है, वह भी नहीं दिया गया है, इस पर एनआरएचएम की एमडी ने नाराजगी जताते हुए समय पर वेतन देने का आदेश तक निकाला है, लेकिन उस पर भी अमल नहीं हुआ। एंबुलेंस-108 के ड्राइवर सहित अन्य स्टाफ को भी वेतन नहीं मिला।

ऑल डिपार्टमेंट आउटसोर्स, अस्थाई कर्मचारी मोर्चा ने जताया विरोध:आउटसोर्स, अस्थाई कर्मचारियों ने कर्ज लेकर मनाया त्योहार : वासुदेव शर्मा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दिवाली त्योहार के मद्देनजर प्रदेश के कर्मचारियों को अक्टूबर का वेतन 4 दिन पहले दे दिया। उन्होंने अनियमित कर्मचारियों को भी दिवाली से पहले वेतन देने को कहा था, पर अस्थाई और आउटसोर्स कर्मचारियों के मामले में ऐसा नहीं हुआ। इन कर्मचारियों को अब तक वेतन नहीं मिला है। ऑल डिपार्टमेंट आउटसोर्स, अस्थाई कर्मचारी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा ने आरोप लगाया कि कंपनी प्रबंधकों एवं अधिकारियों ने मिलकर मुख्यमंत्री की घोषणा पर अमल नहीं होने दिया। शर्मा ने कहा कि दिवाली पर प्रदेश के लाखों आउटसोर्स, अस्थाई कर्मचारियों की जेब खाली रहीं। उन्होंने कर्ज लेकर घरों में दिए जलाए, बच्चों के लिए मिठाई और फटाखे लाए। वेतन नहीं मिलने से दिवाली पर नए कपड़े लेने की इच्छा पूरी नहीं कर सके। मुख्यमंत्री की घोषणा स्कूलों, छात्रावासों, पंचायतों के चपरासियों, चौकीदारों, निकायों के सफाई कर्मियों तक को दिवाली पर वेतन नहीं दिला सकी। ग्राम पंचायतों में कार्यरत चौकीदार, भृत्य, पंप आपरेटर, सफाई कर्मियों को भी दिवाली पर वेतन दिलाने में सरकार असफल रही। त्योहार के दिन हड़ताल, दिए ज्ञापन शर्मा ने बताया कि वेतन से वंचित अस्पतालों के कर्मचारियों ने दिवाली के दिन ग्वालियर, रीवा में हड़ताल की। जिलों में दिवाली से पहले वेतन देने के प्रमुख सचिवों के आदेशों को लेकर कलेक्टरों को ज्ञापन दिए गए, लेकिन कंपनी प्रबंधन और अधिकारियों ने उन आदेशों पर अमल करना तो दूर, पढ़ना भी जरूरी नहीं समझा, उल्टे वेतन मांगने पहुंचे आउटसोर्स कर्मचारियों को नौकरी से निकालने की धमकी दी। रीवा में मेडिकल कॉलेज के शिवेंग्र पांडे, विपिन पांडे सहित पांच कर्मियों को नौकरी से निकाल दिया गया। बैतूल में जिला अस्पताल की महिला कर्मचारी अनिता पाल को वेतन मांगने की सजा गालियां खाकर चुकानी पड़ी।शिक्षा विभाग में नहीं हुआ अमल दिवाली से पूर्व वेतन देने की मुख्यमंत्री की घोषणा पर शिक्षा विभाग में अमल नहीं हुआ, जबकि इस विभाग में बड़ी संख्या में आउटसोर्स, अस्थाई कर्मचारी काम करते हैं। शर्मा ने कहा कि स्कूलों, डीईओ, डीपीसी, बीईओ, बीआरसी कार्यालयों एवं छात्रावासों में बड़ी संख्या में कंप्यूटर आपरेटर, भृत्य, चौकीदार, सफाईकर्मी, रसोईया काम करते हैं, दिवाली पर इन्हें वेतन नहीं मिला, जबकि इन्हें दिवाली से पहले वेतन देने के लिए डीपीआई ने भी आदेश निकाला था। इतना ही नहीं स्कूलों में पढ़ाने वाले आउटसोर्स व्यावसायिक प्रशिक्षक, अस्थाई अतिथि शिक्षकों को भी दिवाली पर वेतन नहीं दिया गया, जिससे इनके अंदर गुस्सा है। स्वास्थ्य, आयुष विभाग में भी नहीं हुआ वेतन शर्मा ने बताया कि जिला अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, आयुष विभाग के योग प्रशिक्षक, वार्ड वाय, सुरक्षा गार्डों, सफाईकर्मी आदि को समय पर वेतन नहीं मिला, इस विभाग में तो 4-5 महीने का वेतन बकाया है, वह भी नहीं दिया गया है, इस पर एनआरएचएम की एमडी ने नाराजगी जताते हुए समय पर वेतन देने का आदेश तक निकाला है, लेकिन उस पर भी अमल नहीं हुआ। एंबुलेंस-108 के ड्राइवर सहित अन्य स्टाफ को भी वेतन नहीं मिला।