रुद्राक्ष पर उकेरी पशुपतिनाथ की सूक्ष्म प्रतिमा:2x2 मिमी के टूटे रुद्राक्ष पर बनाई बनाई कलाकृति, गांव के लड़के की अद्भुत चित्रकारी
रुद्राक्ष पर उकेरी पशुपतिनाथ की सूक्ष्म प्रतिमा:2x2 मिमी के टूटे रुद्राक्ष पर बनाई बनाई कलाकृति, गांव के लड़के की अद्भुत चित्रकारी
नीमच के कुचडोद गांव के युवा कलाकार राहुल लोहार ने अपनी अनोखी कला से सबको हैरान कर दिया है। उन्होंने केवल 2x2 मिलीमीटर से भी छोटे टूटे हुए रुद्राक्ष के आधे हिस्से पर भगवान पशुपतिनाथ की बेहद बारीक और सुंदर चित्रकारी बनाई है। यह चित्र साधारण आंखों से नहीं, बल्कि बिल्लोरी कांच (मैग्निफाइंग ग्लास) से देखने पर पूरी खूबसूरती से दिखाई देता है। देसी रंगों से बनी खास पेंटिंग राहुल ने इस पेंटिंग को बनाने में किसी भी महंगे या आधुनिक रंगों का उपयोग नहीं किया। उन्होंने गेरू, सफेदा और गोंद जैसे पुराने समय में इस्तेमाल होने वाले देसी रंगों से यह चित्र तैयार किया। बिना किसी खास ब्रश या मशीन के, राहुल ने तीन घंटे की मेहनत से इस रुद्राक्ष पर भगवान पशुपतिनाथ की छवि उकेरी। खंडित रुद्राक्ष देखकर आया चित्रकारी का विचार राहुल ने बताया कि उनके घर में दो रुद्राक्ष थे, जिनमें से एक थोड़ा टूटा हुआ था। पहले उन्होंने उसे नदी में प्रवाहित करने का सोचा, लेकिन फिर मन में आया कि क्यों न इस पर कुछ अलग किया जाए। तभी उन्होंने उस रुद्राक्ष पर मंदसौर के प्रसिद्ध भगवान पशुपतिनाथ की छवि बनाने का निश्चय किया। यह सूक्ष्म चित्रकारी इतनी बारीक है कि सामान्य आंखों से देख पाना मुश्किल है, लेकिन जब मैग्निफाइंग ग्लास देखा जाता है, तो भगवान पशुपतिनाथ की छवि के हर रंग और रेखा साफ नजर आती है। प्रशासन ने भी की सराहना कलेक्टर अदिति गर्ग ने भी राहुल की इस कलाकृति की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इतने छोटे रुद्राक्ष पर भगवान पशुपतिनाथ की सुंदर छवि बनाना कला और आस्था दोनों का अद्भुत मेल है। देखें कलाकृति की तस्वीरें
नीमच के कुचडोद गांव के युवा कलाकार राहुल लोहार ने अपनी अनोखी कला से सबको हैरान कर दिया है। उन्होंने केवल 2x2 मिलीमीटर से भी छोटे टूटे हुए रुद्राक्ष के आधे हिस्से पर भगवान पशुपतिनाथ की बेहद बारीक और सुंदर चित्रकारी बनाई है। यह चित्र साधारण आंखों से नहीं, बल्कि बिल्लोरी कांच (मैग्निफाइंग ग्लास) से देखने पर पूरी खूबसूरती से दिखाई देता है। देसी रंगों से बनी खास पेंटिंग राहुल ने इस पेंटिंग को बनाने में किसी भी महंगे या आधुनिक रंगों का उपयोग नहीं किया। उन्होंने गेरू, सफेदा और गोंद जैसे पुराने समय में इस्तेमाल होने वाले देसी रंगों से यह चित्र तैयार किया। बिना किसी खास ब्रश या मशीन के, राहुल ने तीन घंटे की मेहनत से इस रुद्राक्ष पर भगवान पशुपतिनाथ की छवि उकेरी। खंडित रुद्राक्ष देखकर आया चित्रकारी का विचार राहुल ने बताया कि उनके घर में दो रुद्राक्ष थे, जिनमें से एक थोड़ा टूटा हुआ था। पहले उन्होंने उसे नदी में प्रवाहित करने का सोचा, लेकिन फिर मन में आया कि क्यों न इस पर कुछ अलग किया जाए। तभी उन्होंने उस रुद्राक्ष पर मंदसौर के प्रसिद्ध भगवान पशुपतिनाथ की छवि बनाने का निश्चय किया। यह सूक्ष्म चित्रकारी इतनी बारीक है कि सामान्य आंखों से देख पाना मुश्किल है, लेकिन जब मैग्निफाइंग ग्लास देखा जाता है, तो भगवान पशुपतिनाथ की छवि के हर रंग और रेखा साफ नजर आती है। प्रशासन ने भी की सराहना कलेक्टर अदिति गर्ग ने भी राहुल की इस कलाकृति की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इतने छोटे रुद्राक्ष पर भगवान पशुपतिनाथ की सुंदर छवि बनाना कला और आस्था दोनों का अद्भुत मेल है। देखें कलाकृति की तस्वीरें