थोक बाजार में टमाटर 1 रुपए प्रति किलो:600 रुपए का टमाटर कैरेट अब मात्र 30 रुपए में बिके

टमाटर की कीमतों में भारी गिरावट से किसान गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। थोक बाजार में टमाटर का भाव मात्र 1 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया है, जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। तलावदा और टोंगनी गांव के किसान अपनी फसल को खेत में ही छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। कई किसान ग्रामीणों को मुफ्त में टमाटर ले जाने की अनुमति भी दे रहे हैं। मजदूरी का खर्च भी नहीं निकल पा रहा तलावदा के किसान महावीर मेरोठा ने एक बीघा में टमाटर की खेती की थी। उन्होंने बताया कि मौजूदा कीमत में टमाटर तोड़ने की मजदूरी का खर्च भी नहीं निकल पा रहा है। टोंगनी के किसान मुकेश मीणा की स्थिति और भी चिंताजनक है। उन्होंने सात बीघा में टमाटर की खेती की थी। पिछले साल 25 किलो के एक कैरेट का भाव 600 रुपए था, जबकि इस बार यह मात्र 30 रुपए में बिक रहा है। खेती की लागत भी नहीं निकल रही किसानों का कहना है कि एक बीघा खेत में लगभग 50 हजार रुपए की लागत आती है, लेकिन वर्तमान कीमतों में उनकी लागत भी पूरी नहीं हो रही। मजबूरी में किसान टमाटर को खेत में ही छोड़ रहे हैं या फिर मवेशियों को खिला रहे हैं। व्यापारियों की राय व्यापारी धर्मेंद्र चौहान का कहना है कि स्थानीय स्तर पर टमाटर की खेती कम होती है, लेकिन इस बार थोक बाजार में भी कीमतें बहुत कम हैं। इससे किसानों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।

थोक बाजार में टमाटर 1 रुपए प्रति किलो:600 रुपए का टमाटर कैरेट अब मात्र 30 रुपए में बिके
टमाटर की कीमतों में भारी गिरावट से किसान गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। थोक बाजार में टमाटर का भाव मात्र 1 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गया है, जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। तलावदा और टोंगनी गांव के किसान अपनी फसल को खेत में ही छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। कई किसान ग्रामीणों को मुफ्त में टमाटर ले जाने की अनुमति भी दे रहे हैं। मजदूरी का खर्च भी नहीं निकल पा रहा तलावदा के किसान महावीर मेरोठा ने एक बीघा में टमाटर की खेती की थी। उन्होंने बताया कि मौजूदा कीमत में टमाटर तोड़ने की मजदूरी का खर्च भी नहीं निकल पा रहा है। टोंगनी के किसान मुकेश मीणा की स्थिति और भी चिंताजनक है। उन्होंने सात बीघा में टमाटर की खेती की थी। पिछले साल 25 किलो के एक कैरेट का भाव 600 रुपए था, जबकि इस बार यह मात्र 30 रुपए में बिक रहा है। खेती की लागत भी नहीं निकल रही किसानों का कहना है कि एक बीघा खेत में लगभग 50 हजार रुपए की लागत आती है, लेकिन वर्तमान कीमतों में उनकी लागत भी पूरी नहीं हो रही। मजबूरी में किसान टमाटर को खेत में ही छोड़ रहे हैं या फिर मवेशियों को खिला रहे हैं। व्यापारियों की राय व्यापारी धर्मेंद्र चौहान का कहना है कि स्थानीय स्तर पर टमाटर की खेती कम होती है, लेकिन इस बार थोक बाजार में भी कीमतें बहुत कम हैं। इससे किसानों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।