केंद्रीय विद्यालय-1 के छात्रों ने जाना साँची-उदयगिरी गुफा का इतिहास:प्राचार्य गौरव द्विवेदी के निर्देशन में कक्षा छठवीं के विद्यार्थियों का शैक्षिक भ्रमण
केंद्रीय विद्यालय-1 के छात्रों ने जाना साँची-उदयगिरी गुफा का इतिहास:प्राचार्य गौरव द्विवेदी के निर्देशन में कक्षा छठवीं के विद्यार्थियों का शैक्षिक भ्रमण
केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-1 के कक्षा छठवीं के विद्यार्थियों ने गुरूवार को प्राचार्य गौरव द्विवेदी के निर्देशन में साँची और उदयगिरी की गुफाओं का शैक्षिक भ्रमण किया। इस भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को इन ऐतिहासिक स्थलों के सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व से अवगत कराना था। विद्यार्थियों को यात्रा के दौरान बताया गया कि उदयगिरी की गुफाएं मानव सभ्यता के प्रारंभिक कला रूपों को प्रदर्शित करती हैं। इन गुफाओं में प्राचीन चित्रकला और शिल्पकला के अद्भुत उदाहरण देखने को मिलते हैं, जो भारतीय कला की समृद्ध विरासत को दर्शाते हैं। वहीं, साँची के बारे में जानकारी दी गई कि यहाँ स्थित शिवालय और स्तूप प्राचीन भारत के अद्वितीय स्थापत्य और धार्मिक महत्व को उजागर करते हैं। स्तूप, जो कि एक अर्धगोलाकार या गुम्बददार स्मारक होता है, बौद्ध धर्म में ध्यान और साधना का केंद्र माना जाता था, जहाँ धार्मिक अवशेष रखे जाते थे। इस शैक्षिक भ्रमण में विद्यार्थियों के साथ उनके शिक्षक भी थे, जिनमें अनिल मिश्रा, शिरीन कुरैशी, सुनीता कुमारी, अंजू चौबे, ममता श्रीवास्तव, श्रुति शर्मा, दिव्या शुक्ला, पंडा मुंडा और शमशूर शामिल थे। इस भ्रमण ने विद्यार्थियों को भारतीय इतिहास और संस्कृति के महत्वपूर्ण पहलुओं से परिचित कराया और उनके ज्ञान में वृद्धि की। केंद्रीय विद्यालय के इस शैक्षिक भ्रमण ने विद्यार्थियों को न सिर्फ ऐतिहासिक स्थल देखने का अवसर दिया, बल्कि उन्हें भारत के गौरवमयी अतीत के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई।
केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-1 के कक्षा छठवीं के विद्यार्थियों ने गुरूवार को प्राचार्य गौरव द्विवेदी के निर्देशन में साँची और उदयगिरी की गुफाओं का शैक्षिक भ्रमण किया। इस भ्रमण का उद्देश्य विद्यार्थियों को इन ऐतिहासिक स्थलों के सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व से अवगत कराना था। विद्यार्थियों को यात्रा के दौरान बताया गया कि उदयगिरी की गुफाएं मानव सभ्यता के प्रारंभिक कला रूपों को प्रदर्शित करती हैं। इन गुफाओं में प्राचीन चित्रकला और शिल्पकला के अद्भुत उदाहरण देखने को मिलते हैं, जो भारतीय कला की समृद्ध विरासत को दर्शाते हैं। वहीं, साँची के बारे में जानकारी दी गई कि यहाँ स्थित शिवालय और स्तूप प्राचीन भारत के अद्वितीय स्थापत्य और धार्मिक महत्व को उजागर करते हैं। स्तूप, जो कि एक अर्धगोलाकार या गुम्बददार स्मारक होता है, बौद्ध धर्म में ध्यान और साधना का केंद्र माना जाता था, जहाँ धार्मिक अवशेष रखे जाते थे। इस शैक्षिक भ्रमण में विद्यार्थियों के साथ उनके शिक्षक भी थे, जिनमें अनिल मिश्रा, शिरीन कुरैशी, सुनीता कुमारी, अंजू चौबे, ममता श्रीवास्तव, श्रुति शर्मा, दिव्या शुक्ला, पंडा मुंडा और शमशूर शामिल थे। इस भ्रमण ने विद्यार्थियों को भारतीय इतिहास और संस्कृति के महत्वपूर्ण पहलुओं से परिचित कराया और उनके ज्ञान में वृद्धि की। केंद्रीय विद्यालय के इस शैक्षिक भ्रमण ने विद्यार्थियों को न सिर्फ ऐतिहासिक स्थल देखने का अवसर दिया, बल्कि उन्हें भारत के गौरवमयी अतीत के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई।