आयुर्वेद दिवस पर वृद्धजनों के लिए स्वास्थ्य शिविर का आयोजन:विशेषज्ञों ने उम्र से संबंधित बीमारियों को रोकने पर दिया व्याख्यान
आयुर्वेद दिवस पर वृद्धजनों के लिए स्वास्थ्य शिविर का आयोजन:विशेषज्ञों ने उम्र से संबंधित बीमारियों को रोकने पर दिया व्याख्यान
धार में 9वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर शासकीय जिला आयुर्वेद चिकित्सालय मगजपूरा में पेंशनरों के लिए स्वास्थ्य शिविर और व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम वृद्धावस्था से संबंधित रोगों और उनकी रोकथाम पर केंद्रित था। स्वास्थ्य जांच का संचालन आयुर्वेदिक विशेषज्ञों डॉ. अतुल तोमर, डॉ. नरेश वागुल, और डॉ. भाग्यश्री नावड़े ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत भगवान धन्वंतरि की पूजा से हुई, जो आयुर्वेद की प्राचीन जड़ों और स्वास्थ्य के दिव्य संबंध का प्रतीक हैं। शिविर में वृद्धजनों के लिए स्वास्थ्य परीक्षण और आयुर्वेदिक जांच की गई, जिसमें रक्तचाप, शुगर स्तर, हीमोग्लोबिन, वजन, और आयुर्वेदिक शारीरिक संरचना विश्लेषण शामिल थे। रोगों की रोकथाम पर विशेषज्ञों का व्याख्यान
स्वास्थ्य जांच के बाद वृद्धावस्था से संबंधित रोगों की रोकथाम और प्रबंधन पर एक व्याख्यान हुआ। इसमें पेंशनरों को प्रमुख विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन दिया। व्याख्यान में आयुर्वेद की भूमिका पर चर्चा की गई, खासकर उच्च रक्तचाप, मधुमेह, जोड़ों का दर्द, और पाचन विकारों के समाधान के बारे में। विशेषज्ञों ने आयुर्वेदिक जीवनशैली और प्राकृतिक उपचारों को अपनाने का महत्व बताया। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के तरीकों पर हुई चर्चा
कार्यक्रम में आयुर्वेद द्वारा वृद्धावस्था की देखभाल के अनोखे दृष्टिकोण पर बात की गई। डॉ. मुवेल ने समझाया कि कैसे आयुर्वेद शरीर के दोषों को संतुलित कर उम्र से संबंधित बीमारियों को रोकने में मदद करता है। डॉ. वागुल ने पंचकर्म थेरेपी के फायदों की जानकारी दी। वहीं डॉ. तोमर ने दैनिक दिनचर्या और आहार के महत्व पर जोर दिया, जो वृद्धावस्था में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक हैं।
धार में 9वें आयुर्वेद दिवस के अवसर पर शासकीय जिला आयुर्वेद चिकित्सालय मगजपूरा में पेंशनरों के लिए स्वास्थ्य शिविर और व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम वृद्धावस्था से संबंधित रोगों और उनकी रोकथाम पर केंद्रित था। स्वास्थ्य जांच का संचालन आयुर्वेदिक विशेषज्ञों डॉ. अतुल तोमर, डॉ. नरेश वागुल, और डॉ. भाग्यश्री नावड़े ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत भगवान धन्वंतरि की पूजा से हुई, जो आयुर्वेद की प्राचीन जड़ों और स्वास्थ्य के दिव्य संबंध का प्रतीक हैं। शिविर में वृद्धजनों के लिए स्वास्थ्य परीक्षण और आयुर्वेदिक जांच की गई, जिसमें रक्तचाप, शुगर स्तर, हीमोग्लोबिन, वजन, और आयुर्वेदिक शारीरिक संरचना विश्लेषण शामिल थे। रोगों की रोकथाम पर विशेषज्ञों का व्याख्यान
स्वास्थ्य जांच के बाद वृद्धावस्था से संबंधित रोगों की रोकथाम और प्रबंधन पर एक व्याख्यान हुआ। इसमें पेंशनरों को प्रमुख विशेषज्ञों ने मार्गदर्शन दिया। व्याख्यान में आयुर्वेद की भूमिका पर चर्चा की गई, खासकर उच्च रक्तचाप, मधुमेह, जोड़ों का दर्द, और पाचन विकारों के समाधान के बारे में। विशेषज्ञों ने आयुर्वेदिक जीवनशैली और प्राकृतिक उपचारों को अपनाने का महत्व बताया। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के तरीकों पर हुई चर्चा
कार्यक्रम में आयुर्वेद द्वारा वृद्धावस्था की देखभाल के अनोखे दृष्टिकोण पर बात की गई। डॉ. मुवेल ने समझाया कि कैसे आयुर्वेद शरीर के दोषों को संतुलित कर उम्र से संबंधित बीमारियों को रोकने में मदद करता है। डॉ. वागुल ने पंचकर्म थेरेपी के फायदों की जानकारी दी। वहीं डॉ. तोमर ने दैनिक दिनचर्या और आहार के महत्व पर जोर दिया, जो वृद्धावस्था में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक हैं।