उज्जैन में बौद्ध महास्तूप महोत्सव का आयोजन:सैकड़ों अनुयायियों ने की विश्व शांति की प्रार्थना; पंचशील ध्वजारोहण हुआ

उज्जैन के तराना मार्ग स्थित कानीपुरा की वैश्य टेकरी पर भारतीय बौद्ध महासभा द्वारा विश्व शांति महास्तूप महोत्सव का आयोजन किया गया। फरवरी के पहले रविवार को आयोजित इस कार्यक्रम में सांसद अनिल फिरोजिया, धम्म गुरु सागर थेरो और भंते धम्म बोधी समेत अन्य लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में पंचशील ध्वजारोहण के साथ गौतम बुद्ध की प्रतिमा के समक्ष विश्व शांति की प्रार्थना की गई। भारतीय बौद्ध महासभा उज्जैन के मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र सोलंकी ने बताया कि कानीपुरा स्थित बौद्ध स्तूप पर तथागत गौतम बुद्ध की चीवर और आसंदी है। उन्होंने सांची और बिहार के खुशीनगर की तर्ज पर उज्जैन में भी बौद्ध महास्तूप का विकास करने की मांग की। सम्राट अशोक की रानी वैश्य ने कराया था विस्तार ऐतिहासिक महत्व की दृष्टि से यह स्थान बेहद खास है। सम्राट अशोक ने उज्जैन में कई बौद्ध स्तूप बनवाए थे, जिनमें कानीपुरा का स्तूप सबसे बड़ा माना जाता है। वैश्य टेकरी के नाम से प्रसिद्ध इस स्तूप का विस्तार सम्राट अशोक की रानी वैश्य ने करवाया था। केंद्र सरकार के संरक्षण में आने वाले इस स्तूप की 1938-39 में हुई खुदाई में बौद्ध स्तूप होने के कई प्रमाण मिले थे। प्रतिवर्ष यहां होने वाले महोत्सव में प्रदेश भर से सैकड़ों बौद्ध अनुयायी और बाबा साहेब के विचारधारा को मानने वाले लोग शामिल होते हैं। इस साल भी कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं और धार्मिक परंपराएं निभाई गईं।

उज्जैन में बौद्ध महास्तूप महोत्सव का आयोजन:सैकड़ों अनुयायियों ने की विश्व शांति की प्रार्थना; पंचशील ध्वजारोहण हुआ
उज्जैन के तराना मार्ग स्थित कानीपुरा की वैश्य टेकरी पर भारतीय बौद्ध महासभा द्वारा विश्व शांति महास्तूप महोत्सव का आयोजन किया गया। फरवरी के पहले रविवार को आयोजित इस कार्यक्रम में सांसद अनिल फिरोजिया, धम्म गुरु सागर थेरो और भंते धम्म बोधी समेत अन्य लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में पंचशील ध्वजारोहण के साथ गौतम बुद्ध की प्रतिमा के समक्ष विश्व शांति की प्रार्थना की गई। भारतीय बौद्ध महासभा उज्जैन के मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र सोलंकी ने बताया कि कानीपुरा स्थित बौद्ध स्तूप पर तथागत गौतम बुद्ध की चीवर और आसंदी है। उन्होंने सांची और बिहार के खुशीनगर की तर्ज पर उज्जैन में भी बौद्ध महास्तूप का विकास करने की मांग की। सम्राट अशोक की रानी वैश्य ने कराया था विस्तार ऐतिहासिक महत्व की दृष्टि से यह स्थान बेहद खास है। सम्राट अशोक ने उज्जैन में कई बौद्ध स्तूप बनवाए थे, जिनमें कानीपुरा का स्तूप सबसे बड़ा माना जाता है। वैश्य टेकरी के नाम से प्रसिद्ध इस स्तूप का विस्तार सम्राट अशोक की रानी वैश्य ने करवाया था। केंद्र सरकार के संरक्षण में आने वाले इस स्तूप की 1938-39 में हुई खुदाई में बौद्ध स्तूप होने के कई प्रमाण मिले थे। प्रतिवर्ष यहां होने वाले महोत्सव में प्रदेश भर से सैकड़ों बौद्ध अनुयायी और बाबा साहेब के विचारधारा को मानने वाले लोग शामिल होते हैं। इस साल भी कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं और धार्मिक परंपराएं निभाई गईं।